श्रीलंका में चिकन और अंडे का धंधा ध्वस्त होने के कगार पर है। इसका एक प्रमुख कारण महंगाई के कारण लोगों की घटी क्रय शक्ति है। चिकन उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक बीते तीन महीनों में देश में चिकन की बिक्री 30 फीसदी और अंडे की बिक्री 40 फीसदी घट चुकी है। इस वजह से इस कारोबार से जुड़े लोग गहरी मुसीबत में हैं।
श्रीलंका के बाजारों में आज एक किलो चिकन तकरीबन 1,200 श्रीलंकाई रुपये में मिल रहा है। आर्थिक संकट की शुरुआत के समय ये भाव 460 रुपये किलो था। श्रीलंका में मई में मुद्रास्फीति की दर 39 फीसदी रही। इस बीच डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई रुपये की कीमत औंधे मुंह गिरी है। इस समय एक डॉलर लगभग 360 रुपये के बराबर है।
विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई और मुद्रा के भारी अवमूल्यन का एक नतीजा यह है कि लोगों की थाली से पौष्टिक खाद्य दूर होते जा रहे हैं। प्रोटीन की कमी से देश में बड़े पैमाने पर कुपोषण फैलने की आशंका मंडरा रही है। बात सिर्फ चिकन या अंडों की महंगाई की नहीं है। साधारण चावल आज लगभग 230 रुपये किलो मिल रहा है।
वेबसाइट इकोनॉमीनेक्स्ट.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल देश में एक अंडा 43 से 50 रुपये तक में मिल रहा है, जबकि पहले इसका भाव 18 से 25 रुपये तक था। अजित गुनासेकरा ने इस वेबसाइट से कहा- ‘मुर्गियों को पूरा चारा नहीं मिल रहा है, इसलिए वे कम अंडे दे रही हैं। एक मुर्गी आम तौर पर रोज एक अंडा देती है। लेकिन अगर उसे उचित भोजन ना मिले, तो फिर उसके अंडा देने का अंतराल बढ़ जाता है।’
मुर्गियों के चारे में मक्का सबसे प्रमुख है। पहले श्रीलंका में मक्का 40 से 45 रुपये प्रति किलो मिलता था। अब ये भाव 80 से 90 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुका है। चावल का उत्पादन घटने के कारण पराली की भी कमी हो गई है। सरकार के विदेशी मुद्रा भंडार की हालत खस्ता है। इसलिए इन चीजों का जरूरत के मुताबिक आयात भी संभव नहीं रह गया है।
जानकारों के मुताबिक चिकन और अंडे की महंगाई का एक कारण परिवहन खर्च में हुई बढ़ोतरी भी है। देश में ज्यादातर बड़े अंडा फार्म कोलंबो के आसपास मौजूद हैं। वहीं से सारे देश में इन्हें भेजा जाता है। पेट्रोल-डीजल के अभाव और उनकी महंगाई के कारण अब इन्हें भेजना पहले की तुलना में बहुत महंगा हो चुका है।