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Sri Lanka Crisis: देश छोड़ बाहर जा बसने की अब लगी होड़, पासपोर्ट दफ्तर के बाहर लगी लंबी कतारें

Tue, 14 Jun 2022 05:07 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो

सार

पासपोर्ट बनवा रहे लोगों से बातचीत से यह साफ है कि देश में बिगड़ रहे आर्थिक हालात के कारण लोग विदेश जाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। जरूरी चीजों के अभाव और महंगाई के कारण देश में मध्य वर्ग का जीना भी मुहाल हो गया है। पासपोर्ट के लिए ज्यादातर अर्जियां इसी तबके के लोग दे रहे हैं...
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श्रीलंका पासपोर्ट कार्यालय के बाहर कतार - फोटो : Agency
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विस्तार
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श्रीलंका के में नया पासपोर्ट बनवाने की होड़ लग गई है। देश के आव्रजन और उत्प्रवासन विभाग ने इस महीने के पहले दस दिन में 31,725 पासपोर्ट जारी किए। पिछले महीने के आखिरी दस दिन (21 से 31 मई) से तुलना करें, तो यह तीन गुना बढ़ोतरी है। मई के आखिरी दस दिन में लगभग 10 हजार पासपोर्ट ही जारी किए गए थे।

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आव्रजन और उत्प्रवासन विभाग के प्रवक्ता पियुमी बंदारा ने वेबसाइट इकोनॉमीनेक्स्ट.कॉम को बताया- ‘पासपोर्ट जारी करने की गति बहुत तेज हो गई है। पहले एक दिन में अधिकतम 2,500 पासपोर्ट जारी करने की सीमा थी। अब ये सीमा 3,500 कर दी गई है।’ अर्जी देने के एक दिन के अंदर पासपोर्ट पाने के लिए अब फीस को बढ़ा कर 15 हजार रुपये कर दिया गया है। इसके बावजूद तुरंत पासपोर्ट लेने के इच्छुक लोगों की कतार लगी हुई है।

दो शिफ्टों में हो रहा है काम

पासपोर्ट दफ्तर के बाहर कतार में खड़े एक व्यक्ति ने वेबसाइट इकोमनीनेक्स्ट से कहा- ‘15 हजार रुपये देकर अगर एक दिन में पासपोर्ट मिल जाता है, तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है। इससे मुझे तुरंत बाहर जाने का मौका मिल जाएगा।’ पासपोर्ट की मांग इतनी ज्यादा है कि आव्रजन और उत्प्रवासन विभाग में अब दो शिफ्टों में काम हो रहा है। पहली शिफ्ट सुबह सात से दोपहर दो बजे और दूसरी शिफ्ट दोपहर दो बजे से रात दस बजे तक चल रही है। पासपोर्ट दफ्तर पर बढ़ती भीड़ के कारण सरकार ने फैसला किया है कि अगले साल से जिला मुख्यालयों में पासपोर्ट बनाने की सुविधा दी जाएगी।

पासपोर्ट बनवा रहे लोगों से बातचीत से यह साफ है कि देश में बिगड़ रहे आर्थिक हालात के कारण लोग विदेश जाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। जरूरी चीजों के अभाव और महंगाई के कारण देश में मध्य वर्ग का जीना भी मुहाल हो गया है। पासपोर्ट के लिए ज्यादातर अर्जियां इसी तबके के लोग दे रहे हैं।

सरकार के कुप्रबंधन के चलते लोग नाराज

माउंट लेविनिया निवासी एंथनी फर्नांडो ने इकोमनीनेक्स्ट से कहा- ‘पहले यह देश रहने लायक था। लेकिन मेरी राय में अब सभी देश छोड़ना चाहते हैं। इस बारे में मैंने पहली बार 2019 में सोचना शुरू किया, जब ईस्टर पर आतंकवादी हमले हुए थे। अब तो श्रीलंका की आजादी के बाद के सबसे खराब हाल में हम लोग पहुंच गए हैं।’ दो बच्चों के पिता फर्नांडो कॉरपोरेट सेक्टर की एक कंपनी में कंसल्टैंट हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के कुप्रबंधन के कारण आज लोग देश से बाहर जाने को मजबूर हो गए हैं।

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देश में लगातार बिगड़ रही आर्थिक हालत के बीच अब चीन और अमेरिका मिल कर श्रीलंका की मदद करने पर विचार कर रहे हैं। इस सिलसिले में यहां सोमवार को दोनों देशों के राजदूतों के बीच एक बैठक हुई। चीन के राजदूत ची झेंगहोंग और अमेरिकी राजदूत जूली चुंग की ये मुलाकात चीनी दूतावास में हुई। बाद में चीनी दूतावास ने एक बयान में कहा- ‘हमारे बीच पारस्परित हित के मुद्दों पर दोस्ताना बातचीत हुई। चीन और अमेरिका श्रीलंका को मौजूदा हाल से उबारने के लिए मिल कर काम करने की स्थिति में हैं।’

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