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Sri Lanka Crisis: श्रीलंका को कर्ज राहत पर वार्ता के लिए राजी हुआ पेरिस क्लब, क्या चीन होगा तैयार?

Mon, 05 Sep 2022 04:05 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो

सार

Sri Lanka Crisis: पेरिस क्लब ने एक बयान में कहा है- ‘हमने कर्ज समय-सारणी के बारे में आईएमएफ के आकलन पर ध्यान दिया है। पेरिस क्लब कर्ज भुगतान प्रक्रिया के बारे में बातचीत शुरू करने को तैयार है। वह उन कर्जदाताओं के साथ तालमेल बनाने को भी इच्छुक है, जो पेरिस क्लब का सदस्य नहीं हैं...
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Sri Lanka Crisis: श्रीलंका के पूर्व प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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पश्चिमी कर्ज दाताओं के समूह पेरिस क्लब ने कहा है कि वह श्रीलंका को दिए गए कर्ज को लौटाने की समयसीमा फिर से तय करने के मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार है। इस खबर से राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की सरकार को राहत मिली है। आर्थिक संकट में फंसे श्रीलंका के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने नया कर्ज मंजूर किया है। लेकिन उसने यह साफ कर दिया है कि कर्ज का भुगतान तभी होगा, जब श्रीलंका के सभी कर्जदाता देश अपने कर्ज वापसी की समय-सारणी फिर से तय करने पर राजी हो जाएंगे।

पेरिस क्लब ने एक बयान में कहा है- ‘हमने कर्ज समय-सारणी के बारे में आईएमएफ के आकलन पर ध्यान दिया है। पेरिस क्लब कर्ज भुगतान प्रक्रिया के बारे में बातचीत शुरू करने को तैयार है। वह उन कर्जदाताओं के साथ तालमेल बनाने को भी इच्छुक है, जो पेरिस क्लब का सदस्य नहीं हैं। इस बातचीत का मकसद श्रीलंका के लिए ऐसा वित्तीय आश्वासन देना होगा, जिसमें बोझ सभी कर्जदाता समान रूप से वहन करें।’

श्रीलंका के अन्य कर्जदाताओं में चीन और भारत भी शामिल हैं। समझा जाता है कि इनमें से चीन को बातचीत की मेज पर लाना कठिन होगा। ऐसे संकेत हैं कि चीन आईएमएफ की शर्त के मुताबिक कदम उठाने को इच्छुक है। आईएमएफ चाहता है कि श्रीलंका को कर्ज देने वाले सभी देश अपने पुराने कर्ज का कुछ हिस्सा माफ करें और बाकी कर्ज को चुकाने की समयसीमा बढ़ाएं।

इस बीच श्रीलंका के कृषि मंत्री महिंदा अमरावीरा ने कहा है कि देश में कुपोषण बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि श्रीलंकाई रुपये की कीमत बेहद गिर जाने के कारण श्रीलंका सरकार लोगों को उपलब्ध कराने के लिए पौष्टिक खाद्यों का आयात करने की स्थिति में नहीं है। अमरावीरा ने कहा कि देश में खाद्य पदार्थों के दाम लगातार चढ़ रहे हैं। उसका परिणाम कुपोषण बढ़ने के रूप में सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने भी कहा है कि श्रीलंका में 2022 में भूख के शिकार बच्चों की संख्या बढ़ी है।

उधर ये बात फिर सामने आई है कि श्रीलंका में किसान नकदी फसलों को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं। वहां फिर से किसान बड़े पैमान पर मिर्च की खेती कर रहे हैं। कृषि मंत्री अमरावीरा ने कहा कि मिर्च की खेती से नकदी कमाने के बढ़ रहे चलन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

अमरावीरा ने कहा- ‘युवा किसानों के लिए धन कमाने का एक खास तरीका मिर्च की खेती है। एक एकड़ खेत में ऐसी खेती से लोग 40 लाख रुपये तक कमा लेते हैं। इसमें आप उससे ज्यादा कमा लेते हैं, जितनी आपके खेत की कीमत है। इसलिए हम मिर्च की खेती के लिए लोगों को प्रोत्साहित करेंगे।’

लेकिन आलोचकों का कहना है कि नकदी फसल की खेती के कारण जरूरी अनाज भी देश को आयात करना पड़ता है। पिछले दो साल से देश के लोग अनाज की भारी महंगाई झेल रहे हैँ। देश में पैदा हुए विदेशी मुद्रा के संकट का एक कारण यह भी है कि श्रीलंका को खाद्य पदार्थों का आयात करना पड़ा है।

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