बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने गुरुवार अपना इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद कोलंबो की सड़कों पर जश्न का माहौल है। प्रदर्शनकारी गोतबाया के इस्तीफे को अपनी जीत के रूप में देख रहे हैं। गुरुवार देर रात कई लोग कोलंबों की सड़कों पर निकले और जश्न मनाया। इस दौरान पटाखे फोड़े गए थे मस्ती में झूमते हुए भी लोग दिखाई दिए। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी अब कब्जाई गईं अहम सरकारी इमारतों से भी हटने लगे हैं।
#WATCH | Yes resignation has been accepted, legal process will follow...Members will be invited tomorrow (to elect a President): Sri Lanka Speaker Mahinda Yapa Abeywarden confirms President Gotabaya Rajapaksa's resignation pic.twitter.com/jLomNW64Cq
निजी दौरे पर गोतबाया: सिंगापुर
श्रीलंका में आर्थिक और राजनीतिक संकट के बीच श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे बृहस्पतिवार को सिंगापुर पहुंच गए। इससे पहले वह अपने देश से फरार होकर मालदीव पहुंच गए थे। इस मसले पर सिंगापुर सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि राजपक्षे यहां निजी यात्रा पर हैं, उन्हें कोई शरण नहीं दी गई है। सिंगापुर के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस बात की पुष्टि हो गई है कि राजपक्षे को सिंगापुर में निजी यात्रा के तौर पर प्रवेश की अनुमति मिली है। बयान में कहा गया कि उन्होंने शरण की कोई मांग नहीं की और न ही उन्हें शरण दी गई है। सिंगापुर आमतौर पर शरण के अनुरोध को मंजूरी नहीं देता है। बृहस्पतिवार शाम 7 बजे राजपक्षे सऊदी एयरलाइंस के विमान एसवी-788 से पहुंचे।
बुधवार को होगा मतदान
श्रीलंका के सांसद गेविंदु कुमारतुंगा ने बताया, नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए बुधवार को मतदान किया जाएगा। उन्होंने बताया, नया राष्ट्रपति चुनने के लिए एक कार्यक्रम तय कर दिया गया है। जल्द ही नामांकन भी प्राप्त हो जाएंगे।
विक्रमसिंघे ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में ली शपथ
गोतबाया राजपक्षे के इस्तीफे के बाद पीएम रानिल विक्रमसिंघे ने देश के कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में शपथ ले ली। उन्हें श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश जयंत जयसूर्या ने शपथ दिलाई।
विक्रमसिंघे का समर्थन करेगी एसएलपीपी
सांसद जब राष्ट्रपति चुनने के लिए बैठेंगे तब विक्रमसिंघे भी एक उम्मीदवार होंगे। राजनीतिक दल जनता श्रीलंका पोदुजना पेरुमना ने विक्रमसिंघे का इस पद के लिए समर्थन करने की घोषणा की है।
1978 के बाद पहली बार राष्ट्रपति का चुनाव
गोतबाया राजपक्षे के इस्तीफे के बाद 1978 के बाद पहली बार श्रीलंका के अगले राष्ट्रपति का चुनाव सांसदों के गुप्त वोट से करेगा। अब तक यह लोकप्रिय जनादेश के जरिए होता था। स्पीकर महिंदा यापा अभयवर्धने ने शुक्रवार को कहा कि 225 सदस्यीय संसद 20 जुलाई को गुप्त वोट से नए राष्ट्रपति का चुनाव करेगी। 1978 के बाद से राष्ट्रपति पद के इतिहास में कभी भी संसद ने राष्ट्रपति के चुनाव के लिए मतदान नहीं किया है। 1982, 1988, 1994, 1999, 2005, 2010, 2015 और 2019 के राष्ट्रपति चुनावों ने उन्हें लोकप्रिय वोट से चुना था। एकमात्र पिछला अवसर जब राष्ट्रपति पद मध्यावधि में खाली हुआ था, वह 1993 में था जब राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदासा की हत्या कर दी गई थी। प्रेमदासा के कार्यकाल के संतुलन को चलाने के लिए संसद द्वारा डीबी विजेतुंगा को सर्वसम्मति से समर्थन दिया गया था। नए राष्ट्रपति नवंबर 2024 तक गोटबाया राजपक्षे के शेष कार्यकाल की सेवा करेंगे।