पीएम विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर राजपक्षे को नया पीएम नियुक्त करने और संसद भंग करने के बाद से श्रीलंका में छाए सियासी गतिरोध को रोकने के लिए राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना 225 सदस्यों वाली संसद को बहाल करने का मन बना रहे हैं। उनके करीबी सूत्र का दावा है कि राष्ट्रपति को अपने फैसले पर पछतावा है।
बता दें कि नवनियुक्त पीएम महिंदा राजपक्षे के बहुमत परीक्षण का आंकड़ा यानी 113 वोट हासिल नहीं कर सकने के कारण संसद में उनकी दावेदारी खत्म हो गई है। जबकि उन्होंने अब तक इस्तीफा भी नहीं दिया है। उधर, संसद भंग कर देश में मध्यावधि चुनाव के राष्ट्रपति के आदेश को श्रीलंका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है, जिसके चलते देश में हालात नियंत्रण से बाहर हैं।
सुप्रीम कोर्ट में संसद भंग के आदेश पर सुनवाई भी लंबित है। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति इसलिए भी संसद भंग करने के फैसले पर पुनर्विचार करने को मजबूर हैं क्योंकि सुनवाई शुरू होने पर शीर्ष अदालत में संसद भंग करने के मामले में राष्ट्रपति के आदेश को अवैध करार दे सकती है। संसद का कार्यकाल 2020 तक है, लेकिन संकट के चलते तय समय से दो साल पहले भी यहां चुनाव कराए जा सकते हैं।
अदालत द्वारा राजपक्षे का पीएम के रूप में कामकाज रोकने से पहले तक श्रीलंका में इस पद के लिए दो-दो उम्मीदवार दावा कर रहे थे। हालांकि राजपक्षे को संसद में बहुमत भी हासिल नहीं है। जबकि विक्रमसिंघे का दावा है कि उन्हें बर्खास्त करना अवैध है, क्योंकि उनके पास संसद में अब भी बहुमत है। राजपक्षे का कहना था कि हमारे संविधान के अनुसार संप्रभुता जनता में निहित है, संसद में नहीं, इसलिए मौजूदा संकट का एकमात्र विकल्प आम चुनाव हैं।