हाल ही में श्रीलंका की सरकार ने भारतीय रुपया को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा के रूप में मंजूरी दी थी। जिसके बाद अब भारत और श्रीलंका के बीच भारतीय मुद्रा में व्यापार हो सकेगा। लेकिन, भारतीय मुद्रा का प्रयोग द्वीप राष्ट्र में घरेलू लेन-देन के लिए नहीं होगा। श्रीलंका के सेंट्रल बैंक ने बुधवार को यह साफ कर दिया है। सेंट्रल बैंक ने साफ कहा है कि द्वीप देश में भारतीय रुपये के साथ किसी भी घरेलू लेनदेन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही उसने लोगों को इस मुद्दे से जुड़ी गलत जानकारी से गुमराह नहीं होने की भी चेतावनी दी है।
शीर्ष बैंक ने कहा कि भले ही भारतीय रुपये (INR) को एक निर्दिष्ट विदेशी मुद्रा के रूप में समर्थन दिया गया है, लेकिन यह घरेलू भुगतान के लिए श्रीलंका में कानूनी निविदा नहीं है। केंद्रीय बैंक ने बयान जारी कर कहा कि श्रीलंका में रहने वालों के बीच कोई भी लेनदेन लंकाई रुपया में होगा। ये मुद्रा श्रीलंका में कानूनी निविदा है। बयान में श्रीलंकाई बैंक ने कहा है कि अगस्त 2022 में श्रीलंका में भारतीय रुपये को विदेशी मुद्रा के रूप में नामित किया गया था।
इसमें यह भी कहा गया है कि मार्च 2000 में लागू हुए भारत-श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौते के बाद श्रीलंका और भारत के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है। दोनों देशों के बीच बढ़ती आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए कई बार सेंट्रल बैंक ऑफ श्रीलंका ने आरबीआई को बताया है कि वह भारतीय मुद्रा को एक निर्दिष्ट विदेशी मुद्रा के रूप में अधिकृत करने की इच्छा रखता है।
बता दें कि यह बयान श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की भारत की आधिकारिक यात्रा के बाद आया है। अपनी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित शीर्ष भारतीय नेतृत्व के साथ रानिल विक्रमसिंघे ने बातचीत की थी। श्रीलंकाई बैंक ने भारतीय रुपये को विदेशी मुद्रा के रूप में अधिकृत करने के लाभ भी गिनाए हैं। बैंक ने कहा कि भारतीय रुपये से संबंधित बैंकिंग लेनदेन से छोटे पैमाने के व्यापारियों के लिए सुविधा होगी।
रुपए में लेनदेन से क्या फायदा होगा?
जब दो देश आयात सामान का आयात-निर्यात करते हैं तो उन्हें यूएस डॉलर में भुगतान करना होता है क्योंकि यूएस डॉलर ही दुनिया की रिजर्व करेंसी है। उदाहरण के लिए अगर भारत को जर्मनी से कोई सामान खरीदना है तो भारत को अपनी मुद्रा रुपए को अमेरिकी डॉलर में बदलना होगा और उसके बाद भुगतान होगा। वहीं जर्मनी को भी भुगतान में मिली राशि को अपनी मुद्रा में बदलवाना होगा। इससे दोनों देशों को कनवर्जन शुल्क का देना होगा और साथ ही यूएस डॉलर की कीमत में आ रहे उतार-चढ़ाव के खतरे को भी झेलना होगा। अब भारत को अपनी मुद्रा में व्यापार करने पर उसे फायदा होगा और उसे कनवर्जन शुल्क और डॉलर की कीमतों में उतार चढ़ाव के खतरे का सामना नहीं करना पड़ेगा।