अनुरा कुमारा दिसानायके, श्रीलंका के राष्ट्रपति
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श्रीलंका सरकार ने शनिवार को कहा कि उसने अदाणी ग्रीन एनर्जी की मन्नार और पूनरीयन जिलों में पवन ऊर्जा परियोजनाओं की समीक्षा के लिए एक समिति नियुक्त की है। इसके साथ ही, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय कंपनी को दी गई इन परियोजनाओं को रद्द करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकारी प्रवक्ता नलिंडा जयथिसा ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार ने 2023 में पिछली प्रशासन की तरफ से तय की गई बिजली खरीद दरों पर आधारित समझौता करने से मना कर दिया।
'परियोजनाओं को रद्द करने का कोई फैसला नहीं'
उन्होंने कहा, 'मन्नार और पूनरीयन परियोजनाओं को रद्द करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है, बल्कि इनकी समीक्षा के लिए एक समिति नियुक्त की गई है। समिति ने अपना काम शुरू कर दिया है, और समीक्षा पूरी होने के बाद हम यह तय करेंगे कि इसमें क्या बदलाव करने की आवश्यकता है'।
पिछली सरकार में 20 साल का बिजली खरीद समझौता
पिछली सरकार के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने पिछले साल मई में 484 मेगावाट की अदानी पवन परियोजनाओं के लिए 20 साल का बिजली खरीद समझौता किया था, जिसमें प्रति यूनिट 0.826 अमेरिकी डॉलर की दर निर्धारित की गई थी। इस निर्णय की आलोचना हुई थी क्योंकि स्थानीय निविदाकर्ताओं ने कम दरों की पेशकश की थी।
हम प्रस्तावित कीमतों से सहमत नहीं हैं- जयथिसा
सरकारी प्रवक्ता नलिंडा जयथिसा ने कहा, 'हम प्रस्तावित कीमतों से सहमत नहीं हैं। इसलिए, पिछली मूल्य निर्धारण संधि को रद्द कर दिया गया और समिति को परियोजना और इसके मूल्य निर्धारण ढांचे की समीक्षा करने का कार्य सौंपा गया'। उन्होंने यह भी बताया कि अदाणी समझौते के खिलाफ पांच अदालतों में मामले लंबित हैं, जो मुख्य रूप से पर्यावरण संगठनों की तरफ से दायर किए गए हैं। पर्यावरणीय एनजीओ ने याचिकाएं दायर की थीं, जिसमें कहा गया था कि ये परियोजनाएं जैव विविधता के लिए खतरा हैं और प्रवासी पक्षियों के लिए भी जोखिम पैदा करती हैं।