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Pakistan: टूटने की तरफ बढ़ रहा है पाकिस्तान का सत्ताधारी गठबंधन? पीडीएम में मिल रहे मतभेद के संकेत

Tue, 11 Jul 2023 05:14 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

Pakistan: जेयूआई-एफ के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने हाल में दुबई में हुई पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की बैठक को लेकर अपना कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने कहा है कि दुबई में ऐसी बैठक आयोजित करने के पहले पीएमएल-एन को गठबंधन में शामिल सभी दलों को भरोसे में लेना चाहिए था...
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Pakistan: Maulana Fazlur Rehman - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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पाकिस्तान में अगले चुनाव की चर्चा तेज होते ही सत्ताधारी गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) में मतभेद के संकेत मिलने लगे हैं। इसकी ताजा मिसाल गठबंधन में शामिल तीसरे सबसे बड़े दल जमात-ए-उलेमा-ए-इस्लाम- फजलुर (जेयूआई-एफ) की सार्वजनिक रूप से जताई गई नाराजगी है। कुछ खबरों में बताया गया है कि पीडीएम में शामिल कुछ दल चुनाव में अलग से मैदान में उतरने पर विचार कर रहे हैं।

जेयूआई-एफ के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने हाल में दुबई में हुई पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की बैठक को लेकर अपना कड़ा एतराज जताया है। रहमान पीडीएम के भी अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा है कि दुबई में ऐसी बैठक आयोजित करने के पहले पीएमएल-एन को गठबंधन में शामिल सभी दलों को भरोसे में लेना चाहिए था। दुबई की बैठक में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अलावा पीएमएल-एन के सभी बड़े नेता शामिल हुए थे। इस बैठक के लिए पार्टी सुप्रीमो नवाज शरीफ लंदन से दुबई आए थे। इसके पहले शहबाज शरीफ ने लंदन जाकर अपने बड़े भाई से विचार विमर्श किया था।

बताया जाता है कि दुबई की बैठक में अगले आम चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति तैयार की गई। सूत्रों के मुताबिक फजलुर रहमान इस बात से ज्यादा नाराज हैं कि पीएमएल-एन ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेताओं को राय-मशविरे के लिए दुबई बुलाया, जबकि उन्हें इस बारे में कोई सूचना नहीं दी गई। रहमान ने पत्रकारों से बातचीत में कहा- ‘पीडीएम में शामिल पार्टियां यह सवाल पूछ रही हैं कि दुबई बैठक के बारे में उन्हें भरोसे में क्यों नहीं लिया गया।’

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक नवाज शरीफ ने पिछले 27 जून को पीपीपी के सह-अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी को दुबई आमंत्रित किया था। इन रिपोर्टों के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच अगले आम चुनाव की तारीख और उससे पहले बनने वाली कार्यवाहक सरकार में प्रधानमंत्री के लिए संभावित नामों पर भी चर्चा हुई। बताया जाता है कि इन दोनों मुद्दों के बीच शरीफ और जरदारी में सहमति बन गई है, जबकि फजलुर रहमान और पीडीएम में शामिल बाकी पार्टियों के नेता इस बारे में अंधेरे में हैं।

पीडीएम का गठन पिछले साल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की सरकार को गिराने के लिए हुआ था। इस गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी पीएमएल-एन है, जबकि पीपीपी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। जेयूआई-एफ इसमें तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है, जिसका आधार मुख्य रूप से धार्मिक समूहों में है।

पाकिस्तानी मीडिया में फजलुर रहमान की इस टिप्पणी को काफी अहमियत दी गई है कि पीडीएम की अब जरूरत नहीं बची है। पीडीएम के भविष्य के बारे में पूछे गए सवाल पर रहमान ने कहा कि पीडीएम का गठन पीटीआई की सरकार को हटाने के लिए हुआ था, इसलिए अब इसकी आवश्यकता नहीं है।

पाकिस्तान में नियम है कि चुनाव के पहले कार्यवाहक सरकार बनती है। पंजाब और खैबर पख्तूनवा प्रांतों में कार्यवाहक सरकारें काम संभाल चुकी हैं। दो और प्रांतों- सिंध और बलूचिस्तान के साथ-साथ केंद्र में भी जल्द ही कार्यवाहक सरकार का गठन होने वाला है। कार्यवाहक सरकारें सभी दलों की सहमति से बनती रही हैं, लेकिन इस बार इस प्रक्रिया में इमरान खान की पार्टी पीटीआई को शामिल नहीं किया गया है।

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