हाइकोर्ट की जज मारग्रेट क्लेरी ने निचली अदालत के फैसले को सरासर गलत बताते हुए कहा कि बच्ची के बर्थ सर्टिफिकेट पर स्पर्म डोनर का नाम है और उन दोनों का संबंध बेहद आत्मीय है। बेशक वह बच्ची के साथ नहीं रहता, लेकिन बच्ची का सारा खर्च उठा रहा है, इसलिए उसे ही असली पिता माना जाएगा।
जज ने यह भी कहा कि स्पर्म डोनर को बच्ची का भविष्य तय करने का अधिकार है। उसे बच्ची से मिलने में परेशानी न हो, इसलिए मां को बच्ची के साथ ऑस्ट्रेलिया में ही रहना होगा।