पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने छह जनवरी को आयोजित अपनी प्रेस कांफ्रेंस को रद्द करने का एलान क्यों किया, इसको लेकर यहां कई कयास लगाए जा रहे हैं। ट्रंप ने ये प्रेस कांफ्रेंस पिछले साल छह जनवरी को कैपिटल हिल (अमेरिकी संसद भवन) पर हुए हमले की बरसी पर आयोजित की थी। लेकिन मंगलवार रात उन्होंने इसे रद्द करने का एलान किया।
बताया जाता है कि ट्रंप के कई निकट सहयोगियों ने उन्हें प्रेस कांफ्रेंस रद्द करने की सलाह दी। उनमें टीवी चैनल फॉक्स न्यूज की हॉस्ट लाउरा इनग्राहम और सीनेटर लिंडसे ग्राहम भी हैं। सहयोगियों ने कहा कि राष्ट्रीय मीडिया को फ्लोरिडा राज्य के मार-ए-लागो बुलाना ठीक नहीं होगा। ट्रंप राष्ट्रपति पद से हटने के बाद इसी जगह पर रहते हैं।
पहले कहा गया था कि ट्रंप प्रेस कांफ्रेंस में उन लोगों का समर्थन करेंगे, जिन्हें पिछले साल कैपिटल हिल पर हमले के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। साथ ही ट्रंप प्रेस कांफ्रेंस में अपना यह आरोप दोहराएंगे कि 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में वे विजयी हुई थे, लेकिन धांधली के जरिए उन्हें हरा दिया गया।
वेबसाइट एक्सियोस.कॉम ने बताया है कि लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप को फोन कर प्रेस कांफ्रेंस रद्द करने की सलाह दी। इसके पहले इनग्राहम ने सोमवार को फॉक्स न्यूज पर अपने प्रोग्राम के जरिए यह संदेश दिया था कि प्रेस कांफ्रेंस आयोजित करना सही कदम नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले साल छह जनवरी को एक भयानक घटना हुई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उस घटना की बरसी पर पूर्व राष्ट्रपति का प्रेस के सामने आना सही कदम होगा?
इस बीच छह जनवरी से पहले जारी चर्चा में अमेरिकी लोकतंत्र के भविष्य को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। कनाडा की टोरंटो यूनिर्वसिटी में शांति और संघर्ष अध्ययन केंद्र के प्रमुख रह चुके विशेषज्ञ थॉमस होमर-डिक्सन ने इस मौके पर एक लंबा लेख लिखा है। इसमें उन्होंने चेतावनी दी है कि अगले राष्ट्रपति चुनाव के बाद अमेरिका में दक्षिणपंथी तानाशाही कायम हो सकती है और 2030 तक देश में गृह युद्ध की स्थितियां बन सकती हैं।
कनाडा के अखबार द ग्लोब एंड मेल में लिखे अपने लेख में होमर-डिक्सन ने कहा है- ‘2014 में अगर कोई कहता कि डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बन जाएंगे, तो लोग इसे एक बेतुकी बात मानते। लेकिन आज हम ऐसी दुनिया में रह रहे हैं, जिसमें बेतुकी बातें नियमित रूप से हकीकत बन रही हैँ।’ उन्होंने लिखा है- ‘संभव है कि 2025 तक अमेरिकी लोकतंत्र ढह जाए, जिससे देश में घोर राजनीतिक अस्थिरता पैदा होगी। उसमें व्यापक रूप से हिंसा भी शामिल है। अगर जल्दी नहीं, तो 2030 तक हो सकता है कि अमेरिका में दक्षिणपंथी तानाशाही कायम हो जाए।’
होमर-डिक्सन को गृह युद्ध और हिंसक स्थितियों का अध्ययन करने का चार दशक का अनुभव है। इसलिए उनकी बातों को गंभीरता से लिया गया है। उनके लेख के हिस्से अमेरिकी और दुनिया के दूसरे हिस्सों के मीडिया में छापे गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि 2024 में अगर ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति बने, तो वे प्रतिशोध की भावना लेकर आएंगे।