बच्चों का एक वर्ग वह भी है जिसे अप्रैल में पढ़ाई-लिखाई शुरू करनी थी। मगर कोरोना वायरस और उसके कारण लॉकडाउन ने उनको भी रोक दिया है अब वह कब स्कूल जा पाएंगे और कब शिक्षा शुरू कर पाएंगे, ये भी कोई नहीं कह सकता। ऐसे में बच्चों के भविष्य पर असर पड़ना तय है। इस शोध के लिए बच्चों की जिंदगी से जुड़े कई कारकों पर ध्यान दिया गया उसके बाद रिपोर्ट तैयार की गई।
दरअसल, गरीबी में बच्चों को पाल रहे ज्यादातर लोग वे हैं जो किसी तरह की पार्ट टाइम नौकरी करते हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान ऐसे लोगों की आमदनी पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। बेर्टल्समन फाउंडेशन के अध्यक्ष यार्ग ड्रेगर का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान सरकार द्वारा दी जाने वाली कई सेवाएं भी लोगों तक नहीं पहुंच सकी हैं।
ऐसे में गरीबी में जी रहे इन बच्चों पर काफी असर पड़ा है। इन बच्चों के लिए घर पर रहकर पढ़ाई करना भी मुश्किल था, क्योंकि स्कूल ऑनलाइन क्लास चला रहे थे और इन बच्चों के परिवारों के पास ऑनलाइन पढ़ाई के सभी जरूरी साधन नहीं थे।