कोरोना वायरस की जांच करते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो)
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चीन से बाहर दक्षिण कोरिया में ही सबसे ज्यादा कोरोना वायरस तेजी से फैला था। हालांकि इसने जल्द ही संक्रमण पर काबू पा लिया। जिसके लिए दुनियाभर में उसकी तारीफ हो रही है। सोमवार को दक्षिण कोरिया में कोरोना के केवल 25 मामले सामने आए लेकिन रिएक्टिवेट (पुनरावृत्ति) मामलों ने चिंता बढ़ा दी है।
स्वास्थ्य अधिकारी फिलहाल इस बात की जांच में जुटे हुए हैं कि मरीजों को दोबारा संक्रमण कैसे हो गया। इसी बीच कोरिया सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के निदेशक जोंग इन क्योंग का कहना है कि मरीजों के दोबारा संक्रमित होने की बजाए इस बात की आशंका है कि उनमें वायरस दोबारा एक्टिव हो गया होगा। दूसरे अधिकारियों ने जांच में खामी को इसके पीछे की वजह बताया है।
क्या दोबारा एक्टिव हुआ वायरस
कोरिया सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के निदेशक जोंग इन क्योंग ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके दोबारा संक्रमित होने की बजाए इस बात की संभावना ज्यादा है कि उनके शरीर में वायरस दोबारा रिएक्टिवेट हो गया होगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी यह साफ नहीं है कि इस ट्रेंड के पीछे क्या है। इसकी जांच जारी है। लोगों में दोबारा संक्रमण होना अंतरराष्ट्रीय चिंता है क्योंकि कई देश इस उम्मीद में हैं कि संक्रमित लोग इस वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेंगे।
डब्ल्यूएचओ भी चकराया, जांच में जुटा
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि वह ठीक होने के कुछ समय बाद रोगियों में फिर वायरस मिलने का अध्ययन करवा रहा है। संगठन के मुताबिक, यह नया रुझान है, इसे लेकर ज्यादा डाटा की जरूरत है। संगठन ने जांच के दौरान सैंपल लेने की प्रक्रिया में सावधानी बरतने की बात कही।