दक्षिण कोरिया में मंगलवार रात राष्ट्रपति योल ने टीवी पर आकर देश में मार्शल लॉ लगाने का एलान किया। हालांकि, करीब छह घंटे बाद ही उन्होंने इसे वापस लेने का भी एलान कर दिया। आइए जानते हैं कि दक्षिण कोरिया में इस दौरान क्या हुआ और राष्ट्रपति को लेकर देश में अब आगे क्या हो सकता है।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक योल ने मंगलवार को देश में मार्शल लॉ (इमरजेंसी) लगाने के कुछ ही घंटों बाद इसे हटाने का एलान कर दिया। चौंकाने वाली बात है कि अपने इस फैसले के पीछ योल ने विपक्ष को सत्ता-विरोधी ताकत और लोकतंत्र के लिए खतरा करार दिया था। हालांकि, उनके मार्शल लॉ के एलान ने सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि देश के सभी सांसदों को एकजुट कर दिया, जिन्होंने संसद में साथ आकर राष्ट्रपति के फैसले के खिलाफ एकजुटता दिखाई।
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दक्षिण कोरिया में क्या हुआ, इमरजेंसी क्यों लगी?
दक्षिण कोरिया में मंगलवार रात राष्ट्रपति योल ने टीवी पर आकर देश में मार्शल लॉ लगाने का एलान किया। उन्होंने इसके पीछे कोई स्पष्ट वजह न देते हुए विपक्ष पर सत्ता-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और सरकार को कमजोर बनाने का आरोप लगाया।
इसके बाद उन्होंने मार्शल लॉ के लिए छह बिंदुओं का एक आदेश जारी किया। इसके तहत सेना प्रमुख को मार्शल लॉ कमांडर नियुक्त किया गया और कुछ नियम जारी किए गए।
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- इसके तहत मार्शल लॉ लागू रहने के दौरान देश में राजनीतिक गतिविधियों और पार्टियों पर प्रतिबंध का एलान किया गया।
- इसके अलावा झूठे प्रोपेगैंडा, हड़तालों और सामाजिक अशांति पैदा करने के इरादे से एक जगह पर होने वाले कई लोगों के जुटाव को प्रतिबंधित कर दिया गया।
- आदेश के जरिए देश के मीडिया समूहों को मार्शल लॉ के दायरे में लाया गया और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े डॉक्टर-नर्स, जो कि हड़ताल में शामिल थे, उन्हें भी 48 घंटे के अंदर काम पर लौटने के निर्देश दिए गए।
छह घंटे के अंदर कैसे हट गया मार्शल लॉ?
दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ के एलान के बाद सुरक्षाबलों ने देश की संसद को सील कर दिया। कुछ देर बाद ही संसद की इमारत पर हेलीकॉप्टर लैंड हुए और कई सैनिक बिल्डिंग के अंदर घुस गए। माना जा रहा था कि यह सांसदों को अंदर घुसने से रोकने के लिए कदम था। हालांकि, 190 सांसद किसी तरह संसद पहुंचने में कामयाब रहे और उन्होंने राष्ट्रपति योल के मार्शल लॉ के एलान के खिलाफ प्रस्ताव पर मतदान भी किया। सभी सांसदों ने एकतरफा मार्शल लॉ हटाने के पक्ष में वोटिंग की।
नियमों के मुताबिक, राष्ट्रपति को संसद की तरफ से पास हुए प्रस्ताव के तहत ही आगे फैसले लेने होते हैं। यहां तक कि खुद योल के कैबिनेट ने भी संसद के प्रस्ताव पर तुरंत मुहर लगा दी। ऐसे में मार्शल लॉ के खिलाफ सरकार के ही मंत्रियों और विपक्ष की एकजुटता का असर यून पर भी पड़ा और उन्होंने मार्शल लॉ लगाने के छह घंटे बाद ही इसे वापस ले लिया। हालांकि, इस बीच संसद के बाहर सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी भी इकट्ठा हो गए, जिन्होंने राष्ट्रपति योल के खिलाफ नारेबाजी की और उनकी गिरफ्तारी की मांग उठा दी।
योल ने मार्शल लॉ लगाने की क्या वजह बताई?
यून सुक योल ने बताया कि उन्होंने मार्शल लॉ का एलान देश के उदार लोकतंत्र की 'सत्ता-विरोध ताकतों; और 'उत्तर कोरिया की तरफ से खड़े हो रहे खतरों' से सुरक्षा करने के लिए किया। हालांकि, उन्होंने अपने फैसले पर इसके आगे कोई जानकारी नहीं दी।
इस बीच अंदाजा लगाया जा रहा है कि योल की असल नाराजगी दक्षिण कोरिया की विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी से है, जिसने हाल ही में देश के अगले साल खर्च के लिए तय 677 ट्रिलियन वॉन के बजट से 4.1 ट्रिलियन वॉन की कटौती की है। इस पर राष्ट्रपति ने कहा था कि विपक्ष ने देश चलाने के लिए सभी अहम जरूरतों के खर्च में कटौती करना शुरू कर दिया है।
एशिया में अमेरिका के राजनयिक रह चुके एलन यू ने कहा, "एक बात साफ है कि राष्ट्रपति योल सत्ता में आने के बाद से ही लोकप्रियता खोते जा रहे हैं। उनके साथ कई विवाद भी जुड़े रहे हैं और इसके चलते उन्हें लोगों का समर्थन भी नहीं मिल रहा है। इसलिए वे कुछ कदमों को उठाकर अपनी सरकार को चलाने की कोशिश कर रहे हैं। मार्शल लॉ का एलान भी उनकी इन्हीं जल्दबाजी भरी कोशिशों में से है।"
योल के लिए अब आगे क्या?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब राष्ट्रपति यून सुक योल पर दबाव बढ़ता जा रहा है। विपक्षी पार्टियों ने उन्हें अल्टीमेटम दिया है कि या तो वे अपने पद से इस्तीफा दें या महाभियोग की कार्यवाही का सामना करने के लिए तैयार रहें। दक्षिण कोरिया के मुख्य मजदूर संघ ने योल के इस्तीफे तक अनिश्चितकाल हड़ताल का एलान किया है। संघ ने उन पर लोकतंत्र विरोधी कदम उठाने के आरोप लगाया है। वहीं, राष्ट्रपति योल की खुद की पीपुल्स पावर पार्टी (पीपीपी) ने उनके मार्शल लॉ लगाने के कदम को भयानक करार दिया है और मांग की है कि इस फैसले से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी तय हो।