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South Korea: स्थानीय चुनाव में 12 प्रांत जीते, फिर भी अधूरी रही खुशी; सियोल में मात खा गई ली की पार्टी

Thu, 04 Jun 2026 10:16 AM IST
रिया दुबे सियोल, पीटीआई

सार

दक्षिण कोरिया के स्थानीय चुनावों में राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की डेमोक्रेटिक पार्टी ने 16 में से 12 प्रांतों और प्रमुख क्षेत्रों में जीत दर्ज की, लेकिन सबसे अहम सियोल मेयर चुनाव हार गई। इस वजह से बड़ी चुनावी सफलता के बावजूद पार्टी की जीत पूरी तरह से एकतरफा नहीं मानी जा रही है।
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ली जे म्युंग, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति - फोटो : एक्स/ऑल इंडिया रेडियो न्यूज
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विस्तार
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दक्षिण कोरिया में बुधवार को हुए स्थानीय चुनावों में राष्ट्रपति ली जे म्युंग की सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी ने अधिकांश सीटों पर जीत दर्ज की। लेकिन राजधानी सियोल के मेयर पद की सबसे अहम लड़ाई हार गई। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह परिणाम राष्ट्रपति ली के लिए मिला-जुला संदेश है, क्योंकि उनकी पार्टी ने बड़ी सफलता हासिल की, लेकिन सबसे प्रतिष्ठित चुनावी मुकाबला गंवा दिया।

डेमोक्रेटिक पार्टी ने 12 पदों पर जीत हासिल की

करीब सभी मतों की गिनती पूरी होने तक डेमोक्रेटिक पार्टी ने 16 में से 12 मेयर और प्रांतीय गवर्नर पदों पर जीत दर्ज की। वहीं मुख्य विपक्षी पीपल पावर पार्टी (PPP) ने चार सीटें जीतीं, जिनमें सियोल मेयर का पद भी शामिल है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जंग चुंग-राय ने सियोल में हार को दर्दनाक बताया, हालांकि अन्य क्षेत्रों में मिली जीत के लिए मतदाताओं का आभार जताया।

राष्ट्रपति ली के एक वर्ष पूरे होन के दिन हुआ चुनाव 

यह चुनाव राष्ट्रपति ली के कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने के दिन हुआ। ली को अभी भी 60 प्रतिशत से अधिक जनसमर्थन प्राप्त है। उनकी सरकार को अमेरिका और जापान के साथ संबंधों को संतुलित रखने वाली व्यावहारिक कूटनीति, मजबूत शेयर बाजार और सरकारी फैसलों में पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयासों का लाभ मिला है।

सियोल पर किसने जीत हासिल की?

हालांकि सियोल मेयर पद पर डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार चोंग वोन-ओ शुरुआती रुझानों में आगे थे, लेकिन मतगणना आगे बढ़ने के साथ मौजूदा मेयर ओह से-हून ने बढ़त बना ली और अंततः जीत दर्ज की।

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जीत के बाद ओह से-हून ने कहा कि सियोल के नागरिकों ने यह सुनिश्चित किया है कि देश किसी एक दिशा में अत्यधिक न झुके और लोकतंत्र का संतुलन बना रहे। वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार चोंग वोन-ओ ने हार स्वीकार करते हुए कहा कि वे जनता के फैसले को विनम्रता से स्वीकार करते हैं।

चुनाव के दौरान क्या गड़बड़ी हुई?

चुनाव के दौरान सियोल के कुछ मतदान केंद्रों पर मतपत्रों की कमी के कारण मतदान अस्थायी रूप से रोकना पड़ा, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया। पीपीपी ने इस घटना को मतदाताओं के अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए जांच के आधार पर दोबारा चुनाव कराने की मांग की, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी ने इसे खारिज कर दिया।

सबसे चर्चा में किसकी जीत रही?

इस बीच, संसद के उपचुनावों में भी डेमोक्रेटिक पार्टी ने 14 में से नौ सीटें जीतकर अपनी संसदीय बढ़त और मजबूत कर ली। हालांकि सबसे चर्चित जीत पूर्व पीपीपी नेता हान डोंग-हून की रही, जिन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में बुसान से जीत दर्ज की। हान डोंग-हून ने जीत के बाद कहा कि वे दक्षिण कोरिया के रूढ़िवादी खेमे का पुनर्निर्माण करेंगे और सरकार पर लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखने का दबाव बनाए रखेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़ती पकड़ राष्ट्रपति ली को क्षेत्रीय नीतियों को लागू करने में मदद करेगी, लेकिन सियोल की हार यह संकेत देती है कि विपक्ष अभी भी देश की राजनीति में महत्वपूर्ण ताकत बना हुआ है।

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