दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने मंगलवार को राष्ट्रपति यून सुक येओल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। येओल पर 3 दिसंबर को देश में मार्शल लॉ लगाने के उनके फैसले के कारण महाभियोग लगाया गया है। उन्हें फिलहाल सत्ता से निलंबित कर दिया गया है। जांच अफसरों ने उच्च पदस्थ अधिकारियों के लिए भ्रष्टाचार जांच कार्यालय के हवाले से पुष्टि की है कि सियोल पश्चिमी जिला कोर्ट ने वारंट को मंजूरी दी है।
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, दक्षिण कोरिया में किसी मौजूदा राष्ट्रपति के खिलाफ जारी किया गया यह पहला गिरफ्तारी वारंट है। इससे पहले सोमवार को दक्षिण कोरियाई जांचकर्ताओं ने इस महीने के अल्पकालिक मार्शल लॉ लागू करने के लिए यून के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट मांगा था। यून संभावित विद्रोह के आरोपों में आपराधिक जांच का सामना कर रहे हैं।
180 दिन के अंदर इस बारे में फैसला लेना है
कोर्ट को 180 दिन के अंदर इस बारे में फैसला लेना है कि यून को औपचारिक रूप से पद से हटाया जाए या नहीं। आसान शब्दों में संवैधानिक न्यायालय के पास यह तय करने के लिए 180 दिनों का समय है कि यून को राष्ट्रपति पद से हटाया जाए या उनकी शक्तियां बहाल की जाएं। यदि उन्हें पद से हटा दिया जाता है, तो उनके उत्तराधिकारी को चुनने के लिए 60 दिनों के भीतर राष्ट्रीय चुनाव कराना होगा। ऐसे में जांच अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या यून द्वारा सत्ता हथियाने की गलत कोशिश विद्रोह के समान थी।
कार्यवाहक राष्ट्रपति हान के खिलाफ भी महाभियोग प्रस्ताव पारित
इस बीच दक्षिण कोरिया की संसद में कार्यवाहक राष्ट्रपति हान डक-सू के खिलाफ भी महाभियोग का प्रस्ताव पारित हुआ है। पूर्व राष्ट्रपति यून सूक योल की ओर से लगाए गए मार्शल लॉ समर्थन करने और योल के खिलाफ जांच को मंजूरी न देने पर विपक्षी दल ने संसद में यह प्रस्ताव पारित किया था। दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली के स्पीकर वू वोन-शिक ने कहा था कि प्रधानमंत्री हान डक-सू के महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। 192 सांसदों में से 192 ने महाभियोग के पक्ष में मतदान किया।
क्या है मामला?
दक्षिण कोरिया में तीन दिसंबर की रात इमरजेंसी यानी मार्शल लॉ लगाने का एलान किया गया था। इसके विरोध में देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। विरोध के चलते आखिरकार महज कुछ घंटों के भीतर ही राष्ट्रपति को मार्शल लॉ समाप्त करना पड़ा था। इसे लेकर यून सुक येओल के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद उनको पद से हटा दिया गया था। उनके खिलाफ 204 वोट पड़े, जबकि उनके समर्थन में सिर्फ 85 वोट डाले गए। संसद में राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित होने के बाद उनकी शक्तियां तत्काल रूप से निलंबित हो गईं।
क्या होता है मार्शल लॉ?
मार्शल लॉ एक विशेष स्थिति है, जिसमें सरकार किसी क्षेत्र में सैन्य बलों को प्रशासनिक और कानूनी नियंत्रण प्रदान करती है। यह व्यवस्था तब लागू की जाती है जब देश में गंभीर संकट, व्यापक अशांति, प्राकृतिक आपदा या बाहरी आक्रमण जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। मार्शल लॉ किसी पूरे देश में या किसी खास क्षेत्र में लागू किया जा सकता है। इसे "सैनिक कानून" भी कहा जाता है।