पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात की। बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग और आर्थिक मुद्दे शामिल रहे। पाकिस्तान ने इस मुलाकात को बड़ी उपलब्धि बताया। साथ ही भारत-पाक युद्ध के दौरान अमेरिका के प्रयासों की भी सराहना की। हालांकि, भारत ने साफ कर दिया था कि युद्ध रुकवाने में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी।
छह साल बाद व्हाइट हाउस पहुंचे शहबाज शरीफ ने ट्रंप को “शांति पुरुष” बताया। उन्होंने दावा किया कि ट्रंप की “साहसिक और निर्णायक” पहल से भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम हुआ और दक्षिण एशिया में बड़ा संकट टला। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने बयान जारी कर ट्रंप की कोशिशों को वैश्विक शांति की दिशा में अहम कदम बताया।
भारत का रुख साफ
नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने इस बैठक का संज्ञान लेते हुए स्पष्ट कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं। भारत ने दोहराया कि आतंकवाद जैसे मामलों पर किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है। भारत लगातार कहता रहा है कि संघर्षविराम की सहमति उसके और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच प्रत्यक्ष वार्ता से बनी थी, किसी बाहरी दबाव से नहीं।
अतीत में अमेरिका-पाकिस्तान संबंध
ट्रंप और पाकिस्तान नेतृत्व की यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। 2019 में ट्रंप ने तत्कालीन पीएम इमरान खान पर झूठ बोलने और आतंकियों को पनाह देने के आरोप लगाए थे। ट्रंप के बाद राष्ट्रपति रहे जो बाइडेन ने तो पाकिस्तान को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया और किसी प्रधानमंत्री से औपचारिक बातचीत तक नहीं की।
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पाकिस्तान की आर्थिक अपील और निवेश का न्योता
शहबाज शरीफ ने अमेरिकी कंपनियों को पाकिस्तान के कृषि, आईटी, खनन और ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश का निमंत्रण दिया। उन्होंने गाजा और वेस्ट बैंक में शांति बहाली की ट्रंप की पहल की भी प्रशंसा की। बैठक में पाकिस्तान-अमेरिका व्यापार समझौते की चर्चा हुई, जिसके तहत 19 प्रतिशत टैरिफ व्यवस्था लागू की गई। वर्ष 2024 में दोनों देशों का व्यापार 10.1 अरब डॉलर तक पहुंचा।
आतंकवाद और सुरक्षा पर चर्चा
बैठक का बड़ा हिस्सा आतंकवाद विरोधी सहयोग पर केंद्रित रहा। शहबाज ने कहा कि ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की है। हालांकि, भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर आतंकी संगठनों को संरक्षण देने का आरोप लगाता रहा है। ऐसे में पाकिस्तान का यह दावा भारत को गुमराह करने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को “आतंकवाद पीड़ित” दिखाने की कोशिश माना जा रहा है।
पाकिस्तान-अमेरिका रिश्तों का लंबा इतिहास
शीत युद्ध के दौर में पाकिस्तान और अमेरिका सहयोगी रहे और अफगानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ मिलकर काम किया। लेकिन अफगान तालिबान के मुद्दे पर दोनों की नीतियां अलग हो गईं। 2011 में अमेरिका ने पाकिस्तान में ही अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मार गिराया, जिससे भरोसा बुरी तरह टूटा। अब ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में पाकिस्तान फिर से अमेरिका का करीबी बनने की कोशिश कर रहा है।
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भारत का विरोध और पाकिस्तान की मंशा
भारत इस मुलाकात को पाकिस्तान की कूटनीतिक चाल मान रहा है। पाकिस्तान अमेरिका के जरिए खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश कर रहा है, जबकि असलियत यह है कि उसकी जमीन आतंकियों की पनाहगाह बनी हुई है। भारत ने साफ कर दिया है कि न तो इस तरह की मध्यस्थता स्वीकार होगी और न ही पाकिस्तान का झूठा प्रचार।
मुलाकात का माहौल और अमेरिकी राजनीति
बैठक व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में करीब एक घंटे 20 मिनट तक चली। ट्रंप ने शहबाज और मुनीर का गर्मजोशी से स्वागत किया और मीडिया के सामने उन्हें “ग्रेट लीडर” कहा। बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी मौजूद रहे।
व्यापार आंकड़े और पाकिस्तान का फायदा
साल 2024 में अमेरिका-पाकिस्तान के बीच व्यापार 10.1 अरब डॉलर रहा, जो 2023 से 6.3 प्रतिशत अधिक है। अमेरिकी निर्यात 2.1 अरब डॉलर और आयात 5.1 अरब डॉलर का रहा। अमेरिका का व्यापार घाटा 3 अरब डॉलर पहुंच गया। पाकिस्तान इसे उपलब्धि बताता है, लेकिन असलियत यह है कि उसकी अर्थव्यवस्था अमेरिकी मदद और दबाव पर ही टिकती है।