फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Khalsa Vox Report: खालिस्तानी गतिविधियों ने सिख समुदाय की वैश्विक छवि को पहुंचाया नुकसान, रिपोर्ट में खुलासा

Sat, 23 May 2026 09:23 PM IST
अमन तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ओटावा

सार

‘खालसा वॉक्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, विदेशों में बढ़ती खालिस्तानी गतिविधियों और उग्र प्रदर्शनों ने सिख समुदाय की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाया है।
विज्ञापन
खालिस्तानी झंड़ा (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

खालिस्तानी गतिविधियों ने पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में सिख समुदाय की अच्छी छवि को काफी नुकसान पहुंचाया है। एक नई रिपोर्ट में बताया गया कि, विदेशों में होने वाले हिंसक प्रदर्शनों, भारत विरोधी नारों और धार्मिक स्थलों के बाहर उग्र विरोध ने पूरी दुनिया में विवाद पैदा किया है। कट्टरपंथी तत्वों ने अलगाववादी अभियानों के जरिए माहौल खराब किया है।
विज्ञापन


'खालसा वॉक्स' की एक रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं। इन देशों में खालिस्तान समर्थक समूह लोकतांत्रिक आजादी का बहाना बनाकर कट्टरपंथ और उग्रवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय दूतावासों के बाहर प्रदर्शन, राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान और मंदिरों के पास तनावपूर्ण गतिविधियों ने भारत की छवि के साथ-साथ सिखों की साख पर भी बुरा असर डाला है।

सिख धर्म को हमेशा से मानवता की सेवा के लिए समर्पित और दुनिया के सबसे सम्मानित धर्मों में से एक माना गया है। लेकिन खालिस्तानी समर्थकों और कट्टरपंथी तत्वों की बढ़ती हरकतों ने एक नकारात्मक माहौल बना दिया है। इससे पूरा सिख समुदाय शर्मिंदगी महसूस कर रहा है। सबसे चिंता की बात यह है कि दुनिया के बहुत से लोग सिख धर्म और खालिस्तानी विचारधारा के बीच अंतर नहीं कर पा रहे हैं।
विज्ञापन


रिपोर्ट में आगे कहा गया, कुछ मुट्ठी भर कट्टरपंथी संगठनों की वजह से अब पूरे सिख समुदाय को शक की नजर से देखा जाने लगा है। जबकि हकीकत यह है कि ज्यादातर सिख शांति, भाईचारे और देशभक्ति में गहरा विश्वास रखते हैं। सिखों ने भारत की सेना, न्यायपालिका, राजनीति, उद्योग और समाज सेवा में हमेशा गर्व के साथ अपना योगदान दिया है। ऐसे में कुछ अलगाववादी तत्वों की वजह से पूरी कौम की पहचान पर असर पड़ना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

ये भी पढ़ें: Assam: ईद-उल-जुहा से पहले भड़काऊ बयान पर पूर्व असम विधायक गिरफ्तार, CM हिमंत बिस्व सरमा पर की थी टिप्पणी
विज्ञापन


सिख गुरुओं की शिक्षाएं किसी भी तरह के कट्टरपंथ या नफरत को पूरी तरह नकारती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर के सिखों को उन कट्टरपंथी तत्वों से साफ तौर पर दूरी बना लेनी चाहिए जो समुदाय की छवि बिगाड़ रहे हैं। गुरुद्वारों और सिख संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके धार्मिक मंचों का इस्तेमाल नफरत या राजनीतिक कट्टरपंथ फैलाने के लिए न हो। युवाओं को भड़काऊ बातों के बजाय शिक्षा, समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। सिख समुदाय हमेशा से देश की मजबूती और सामाजिक एकता का एक बड़ा आधार रहा है। यह जरूरी है कि शांतिप्रिय और देशभक्त सिखों की आवाज को दुनिया के सामने मजबूती से रखा जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें