कई अनाजों के बाद अब बारी चावल के महंगा होने की है। चावल के कारोबार से जुड़े लोगों ने ये आशंका जताई है। दुनिया पहले से ही गेहूं, जई (ओट), कुछ अन्य अनाजों, शक्कर, खाद्य तेलों, और मांस की महंगाई से परेशान है। अब संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के मई के आंकड़ों से सामने आया है कि बीते महीने अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल का भाव 12 महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। पिछले पांच महीनों से लगातार चावल महंगा हो रहा है।
जानकारों के मुताबिक अभी दुनिया में चावल का उत्पादन उचित स्तर पर है। लेकिन गेहूं महंगा होने के कारण चावल की मांग बढ़ गई है। जापानी इन्वेस्टमेंट बैंक नोमुरा की मुख्य अर्थशास्त्री सोनाल वर्मा ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनबीसी से कहा- ‘हमें चावल के दामों पर नजर रखनी होगी। गेहूं महंगा होने के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने अपने भोजन में चावल की मात्रा बढ़ा दी है। उससे मौजूद भंडार की तुलना में चावल की मांग बढ़ गई है।’
वर्मा ने कहा कि उर्वरकों की कीमत बढ़ने के कारण खेती की लागत बढ़ गई है। ईंधन की महंगाई भी खेती को प्रभावित कर रही है। फिर भी उन्होंने कहा कि चावल के अन्य अनाजों जितना महंगा होने की संभावना अभी कम है।
चावल की बढ़ती खपत के बीच खबर है कि थाईलैंड और वियतनाम अपने यहां से निर्यात होने वाले चावल की कीमत बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। पिछले हफ्ते एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट में बताया गया कि फिलहाल चावल कारोबारी भारत से अधिक मात्रा में चावल खरीद रहे हैं। वाशिंगटन स्थित अनुसंधान संस्थान- फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट में वरिष्ठ शोधकर्ता डेविड लेबोर्डे ने सीएनबीसी से कहा- ‘अभी मुझे सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर है कि कहीं भारत अगले कुछ हफ्तों में चावल का निर्यात न रोक दे।’
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में चावल उत्पादन के लिहाज से चीन पहले और भारत दूसरे नंबर पर है। इंडोनेशिया तीसरे, बांग्लादेश चौथे, वियतनाम पांचवे और थाईलैंड छठे नंबर पर है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चावल की महंगाई का सबसे बुरा असर एशिया पर पड़ेगा, जहां चावल की सबसे ज्यादा खपत होती है। इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट में दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय प्रतिनिधि नफीस मियां ने कहा- ‘ईस्ट तिमोर, लाओस, कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे देशों की आबादी बड़ी है। वहां बड़ी संख्या में लोग खाद्य असुरक्षा का शिकार हैं। ऐसे में अगर चावल महंगा हुआ, तो उन पर बहुत खराब असर पड़ेगा।’