बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे संजीब वाजेद ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर न्यायपालिका के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के जरिए अवामी लीग के नेतृत्व को निशाना बनाया जा रहा है। वाजेद ने यह आरोप उस समय लगाया है, जब सोमवार को अंतरिम सरकार ने एक राजनयिक नोट भेजकर भारत सरकार से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है।
पांच अगस्त से भारत में रह रहीं शेख हसीना
शेख हसीना (77 वर्षीय) इस साल पांच अगस्त से भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण प्रणाली के खिलाफ छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे। लेकिन अगस्त में यह आंदोलन हिंसक हुआ। इस दौरान कई लोग मारे गए। इसके बाद हसीना को प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। फिर वह भागकर भारत आ गईं। इसके बाद बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध अधिकरण (आईसीटी) ने हसीना और उनके सरकार के मंत्रियों, सलाहकारों, सैन्य और नागरिक अधिकारियों के खिलाफ 'मानवता के खिलाफ अपराध और जनसंहार' के आरोपों में गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
संजीब वाजेद ने क्या आरोप लगाए
वाजेद ने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि यूनुस सरकार ने आईसीटी में कुछ खास जज और अभियोजकों को नियुक्त किया है, जो हसीना और उनके समर्थकों के खिलाफ झूठे और राजनीतिक कारणों से मुकदमा चला रहे हैं। उन्होंने कहा, यह मुकदमा वास्तविक न्याय से बहुत दूर है और यह सिर्फ अवामी लीग पार्टी के नेताओं पर हमला करने का तरीका है। वाजेद एक आईटी उद्यमी हैं और अमेरिका में रहते हैं। वह हसीना की सरकार में आईसीटी के सलाहकार भी रह चुके हैं।
'अंतरिम सरकार में अपराधियों पर नहीं हो रही कार्रवाई'
उन्होंने आगे कहा, कंगारू अधिकरण में यह मुकदमा और इसके बाद प्रत्यर्पण का अनुरोध तब आया, जब सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं की न्यायेतर हत्या कर दी गई। उन पर हत्या के झूठे आरोप लगाए गए। हजारों को गैरकानूनी तरीके से जेल में डाला गया और पुलिस हिंसक हमले, लूटपाट, तोड़फोड़ और आगजनी जैसी घटनाओं में शामिल है, जिन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। यह सब सरकार की नकारात्मकता और अपराधियों को संरक्षण देने की वजह से हो रहा है।
सजीब वाजेद ने कहा कि 22 दिसंबर को आईसीटी न्यायाधिकरण के एक मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम ने अवामी लीग की अध्यक्ष और पूर्व पीएम शेख हसीना के खिलाफ जानबूझकर गलत सूचना फैलाई कि इंटरपोल ने उनके खिलाफ रेड नोटिस जारी किया था। यह शेख हसीना के प्रत्यर्पण और यूनुस के हितों की सेवा का हास्यास्पद परीक्षण करने का एक हताश प्रयास था।
पूर्व पीएम के बेटे ने कहा कि बाद में मीडिया में झूठ उजागर होने के बाद उसी अभियोजक ने अपना बयान बदल दिया। अब आधिकारिक तौर पर प्रत्यर्पण के लिए भारत को अनुरोध भेजा है। हमारा कहना है कि जुलाई और अगस्त के बीच मानवाधिकार उल्लंघन की हर एक घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से जांच की जानी चाहिए। मगर देश में यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार ने न्यायपालिका को हथियार बना दिया है। हमे न्याय प्रणाली पर कोई भरोसा नहीं है।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने फिर की है शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की तरफ से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की गई है। बांग्लादेश की तरफ से भारत को एक नोट भेजा गया है जिसमें कहा गया है कि न्याय का सामना करने के लिए उन्हें बांग्लादेश में भेजा जाना चाहिए। हालांकि इस नोट में ये नहीं बताया गया है कि क्या आरोप हैं।
विरोध प्रदर्शनों में मारे गए 753 लोग: अंतरिम सरकार
बांबांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुताबिक, शेख हसीना की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 753 लोग मारे गए और हजारों घायल हुए। इस मामले में हसीना और उनकी पार्टी के नेताओं के खिलाफ अपराध और नरसंहार की 60 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शेख हसीना के खिलाफ 225 मामले दर्ज हैं, इनमें हत्या के 194, मानवता के विरुद्ध अपराध और नरसंहार के 16 मामले, अपहरण के तीन मामले, हत्या के प्रयास के 11 मामले और ‘बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी’ (बीएनपी) की रैली पर हमले के संबंध में एक मामला शामिल है। 17 अक्तूबर को न्यायाधिकरण ने हसीना और 45 अन्य के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। इसमें उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय और उनके कई पूर्व कैबिनेट सदस्य शामिल हैं।