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मौत की सजा, गिरफ्तारी का डर: फिर क्यों बांग्लादेश लौटना चाहती हैं शेख हसीना? बोलीं- दिसंबर में करूंगी सरेंडर

Fri, 10 Jul 2026 04:17 PM IST
राकेश कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/ ढाका।

सार

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिसंबर 2024 में अपनी अवामी लीग पार्टी के नेताओं के साथ स्वदेश लौटने और अदालत में सरेंडर करने का एलान किया है। भारत में निर्वासित जीवन जी रहीं हसीना ने अपनी जान का खतरा बताते हुए कहा कि वे अपने कार्यकर्ताओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ अपने वतन की मिट्टी पर ही मरना पसंद करेंगी। उन्होंने और क्या-क्या कहा? जानिए...
 
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शेख हसीना, पूर्व प्रधानमंत्री, बांग्लादेश - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने करीब दो साल बाद पहली बार अपनी स्वदेश वापसी की योजना का खुलासा किया है। भारत में रह रही हसीना ने कहा है कि वह इस साल दिसंबर के आसपास बांग्लादेश लौटेंगी और अदालत के सामने आत्मसमर्पण करेंगी। उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि लौटते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है और उनकी जान को भी खतरा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने देश जरूर जाएंगी।
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न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में 78 वर्षीय हसीना ने कहा कि जब मैं वापस जाऊंगी तो मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है। मेरी हत्या भी हो सकती है। लेकिन मैं फिर भी लौटूंगी। मेरे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार कार्रवाई हो रही है। अगर मुझे मरना ही है, तो मैं अपने देश की मिट्टी पर मरना चाहती हूं, जहां मेरे माता-पिता दफन हैं।'

क्या अवामी लीग के नेता भी करेंगे सरेंडर?
इतना ही नहीं, हसीना ने बताया कि वह अकेले नहीं लौटेंगी। उनके साथ भारत और दूसरे देशों में रह रहे अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी बांग्लादेश जाएंगे और अदालत में आत्मसमर्पण करेंगे। इनमें पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमा खान कमाल भी शामिल हैं। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि बांग्लादेश लौटने का फैसला पूरी तरह उनका अपना है। उन्होंने इस बारे में भारत या किसी दूसरे देश की सरकार से कोई सलाह नहीं ली है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र, चुनाव और न्याय जैसे मुद्दों पर किसी तरह की गुप्त बातचीत नहीं हो सकती।
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भारत में रहकर भी पार्टी चला रहीं हसीना
भारत में रहने के बावजूद शेख हसीना लगातार पार्टी नेताओं के संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन बैठकों के जरिए वह अब तक बांग्लादेश की 300 संसदीय सीटों में से 125 सीटों के नेताओं और कार्यकर्ताओं से बात कर चुकी हैं। उनका कहना है कि पार्टी को फिर से मजबूत करने का काम जारी है।

यह भी पढ़ें: Explainer: मौत की सजा, पार्टी पर रोक; शेख हसीना के लिए वतन लौटना नहीं है आसान, कांटे भरे रास्ते कर रहे इंतजार

अदालत में सच सामने आ जाएगा: हसीना
हसीना ने दावा किया कि उनके खिलाफ चल रहे मामले राजनीतिक हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही अदालत में सुनवाई शुरू होगी, लोगों को खुद पता चल जाएगा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप कितने सही हैं। अपने लंबे राजनीतिक सफर पर बात करते हुए शेख हसीना ने कहा कि कोई भी सरकार पूरी तरह गलतियों से मुक्त नहीं होती। उन्होंने कहा कि अगर किसी सरकार से गलतियां हुई हैं तो उसका फैसला जनता करेगी। मैं यह फैसला लोगों पर छोड़ती हूं। हसीना के नेतृत्व में बांग्लादेश ने आर्थिक विकास किया, लेकिन उनके शासन पर विपक्ष को दबाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप भी लगते रहे हैं।

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी नजर
शेख हसीना के इस एलान का असर भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर भी पड़ सकता है। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार पहले ही भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर चुकी है। भारत ने कहा था कि वह इस अनुरोध पर विचार कर रहा है। अब हसीना ने कहा, 'वे मुझे वापस लाने के लिए भारत को बार-बार चिट्ठियां भेज रहे हैं। अब इसकी जरूरत नहीं है। मैं खुद वापस आ रही हूं।' हालांकि, इस बयान पर अभी तक भारत के विदेश मंत्रालय और बांग्लादेश की सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

हसीना मामले से जुड़ीं बड़ी बातें
  • दिसंबर के आसपास बांग्लादेश लौटने का एलान।
  • अदालत में खुद जाकर आत्मसमर्पण करेंगी।
  • गिरफ्तारी और हत्या की आशंका के बावजूद लौटने का फैसला।
  • अवामी लीग के दूसरे नेता भी करेंगे सरेंडर।
  • भारत या किसी विदेशी सरकार से सलाह लेने से इनकार।
  • भारत में रहकर ऑनलाइन पार्टी का संचालन कर रहीं।
  • कहा- अदालत में सच खुद सामने आ जाएगा।

क्या है पूरा मामला? 
शेख हसीना जनवरी 2024 में लगातार चौथी बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनी थीं। लेकिन उसी साल देश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण (कोटा) को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन देखते ही देखते सरकार विरोधी प्रदर्शन में बदल गया। हालात इतने बिगड़ गए कि कई जगह हिंसा हुई और सुरक्षाबलों की कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस हिंसा में करीब 1,400 लोगों की जान गई। विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई करवाई, हालांकि शेख हसीना ने इन आरोपों से इनकार किया है।
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बढ़ते विरोध और सुरक्षा खतरे के बीच अगस्त 2024 में शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गईं। इसके बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए। पिछले साल नवंबर में युद्ध अपराध मामलों की अदालत ने छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े एक मामले में उनकी गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई। हसीना इस फैसले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताती हैं। 
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