जमानत याचिका खारिज होने के बाद शहबाज शरीफ
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सात अरब रुपये के धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में लाहौर उच्च न्यायालय ने पाकिस्तान के नेता प्रतिपक्ष और पीएमएल-एन के अध्यक्ष शहबाज शरीफ की जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के छोटे भाई शहबाज शरीफ को गिरफ्तार कर लिया गया।
शहबाज को अदालत परिसर से गिरफ्तार किया गया। यहां बड़ी संख्या में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के कार्यकर्ता एकत्र थे। उन्हें भ्रष्टाचार रोधी इकाई राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) के अधिकारी लाहौर हिरासत केंद्र ले गए। उन्हें रिमांड के लिए जवाबदेही अदालत में पेश किया जाएगा।
सरदार अहमद नईम की अध्यक्षता वाली लाहौर उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय पीठ ने एनएबी की टीम और शहबाज के वकीलों की दलील सुनने के बाद जमानत याचिका खारिज कर दी। इमरान खान सरकार ने पिछले सप्ताह 69 वर्षीय शहबाज और उनके परिवार के खिलाफ धनशोधन का मामला दायर किया था।
प्रधानमंत्री के आंतरिक और जवाबदेही मामलों के सलाहकार शहजाद अकबर ने 23 सितंबर को आरोप लगाया था कि शहबाज और उनके बेटे हमजा और सलमान ने फर्जी खातों के जरिए धनशोधन को अंजाम दिया।
शहबाज ने अपनी गिरफ्तारी से पहले मीडिया से कहा कि प्रधानमंत्री इमरान खान उन्हें गिरफ्तार कराना चाहते थे। उन्होंने कहा, 'यह इमरान खान और एनएबी का अपवित्र गठबंधन है, जो मुझे सलाखों के पीछे भेजना चाहता है।' शहबाज शरीफ 2008 से 2018 तक पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री थे।
उनकी गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पीएमएल-एन की प्रवक्ता मरयम नवाज ने कहा कि शहबाज को केवल इसलिए गिरफ्तार किया गया है क्योंकि उन्होंने अपने बड़े भाई को नहीं छोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक उत्पीड़न कर रही है। पीडीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी शहबाज की गिरफ्तारी की निंदा की।