भारत भीषण जलसंकट का सामना कर रहा है और यह ‘डे जीरो’ की कगार पर खड़ा है। ‘डे जीरो’ की स्थिति में नलों में भी पानी सूख जाता है। मंगलवार को जारी एक अमेरिकी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
विश्व संसाधन संस्था की ‘एक्वेडक्ट वॉटर रिस्क एटलस’ में जलसंकट, सूखा और नदियों में बाढ़ के खतरे के आधार पर 189 देशों और उनके प्रांतों-राज्यों की रैंकिंग बनाई गई है। इसमें भारत 13वें पायदान पर है। भारत समेत 17 देश खतरनाक स्थिति में खड़े हैं, जिनमें दुनिया की एक चौथाई आबादी रहती है। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर भारत में भूजल स्तर में अत्यंत कमी आई है।
रिपोर्ट में भारत के पूर्व जल संसाधन सचिव शशि शेखर के हवाले से कहा गया है कि हाल ही में चेन्नई के जलसंकट ने दुनिया का ध्यान खींचा लेकिन देश के कई हिस्सों में ऐसी स्थिति है। उन्होंने बताया है कि वर्षा, सतही और भूजल के विश्वसनीय आंकड़ों की मदद से भारत भविष्य के लिए रणनीति बना सकता है।
शेखर का कहना है कि विश्वभर में जल खतरे की पहचान करने और उसे प्राथमिकता बनाने में ‘एक्वेडक्ट’ मदद कर सकता है। ‘एक्वेडक्ट’ के नए हाइड्रोलॉजिकल मॉडल में नक्शे के जरिए जल संकट को अधिक सटीक तस्वीरों से प्रदर्शित किया है। इसे दर्शाने के लिए 13 संकेतकों का उपयोग किया गया है।