राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में उनके सहयोगियों के साथ पसंदीदा सियासी मकसद और परियोजनाओं के लिए करीब दो अरब डॉलर जुटाए हैं। बड़े पैमाने पर जुटाया गया यह धन उनके 2024 के चुनाव अभियान के लिए जुटाई गई राशि से कहीं अधिक है। यह चौंका देने वाली राशि लेनदेन के ऐसे स्तर की ओर इशारा करती है जिसकी तुलना आधुनिक अमेरिकी इतिहास में पहली बार दिखाई दिया। इसके बदले लाभ उठाने वालों में 6 भारतवंशी भी शामिल हैं।
अधिकांश धन के पीछे दानदाताओं की पहचान को कानूनी रूप से सार्वजनिक करना अनिवार्य नहीं है और कुछ मामलों में ट्रंप की टीम ने दानदाताओं को गुमनामी का प्रस्ताव भी दिया गया है। इस कारण छह भारतवंशियों में से सिर्फ गूगल के सुंदर पिचाई और माइक्रोसॉफ्ट के सत्य नडेला के नाम का ही खुलासा हो पाया है।
दान से ट्रंप को लाभ का पता करना मुश्किल
दानदाताओं में यह भी पाया गया कि उनमें से आधे से अधिक लोगों को ट्रंप, व्हाइट हाउस या संघीय एजेंसियों के कार्यों या बयानों से लाभ हुआ है। यह साबित करना संभव नहीं है कि किसी भी दान से ट्रंप प्रशासन द्वारा उन्हें कोई विशेष लाभ पहुंचाया गया हो। ट्रंप को निजी लाभ मिला, यह भी स्पष्ट नहीं है।
किसी को माफी मिली, किसी के केस खत्म हुए
धन मिलने से जिन पार्टियों को लाभ मिलने की बात सामने आई है उनमें किसी को राष्ट्रपति की तरफ से माफी मिली, किसी के खिलाफ चल रहे केस खत्म हुए, किसी कंपनी को बड़े सरकारी ठेके मिले तो किसी को सीधे व्हाइट हाउस तक पहुंच मिली या सरकार में बड़ा पद दिया गया।
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कई संगठनों में लिया गया धन
ट्रंप की टीम में मेक अमेरिका ग्रेट अगेन ने नवंबर 2024 से जून 2025 के बीच 20 करोड़ डॉलर जुटाए। ट्रंप के शपथ समारोह को बनी समिति ने भी 24 करोड़ डॉलर जुटाए। अब व्हाइट हाउस में बॉलरूम के लिए 35 करोड़ डॉलर जुटे हैं।
कई खास कंपनियों और लोगों ने उठाया दान का लाभ
एक महिला ने मागा को 25 लाख डॉलर देकर कुछ महीने में ही अपने पिता को न्याय मंत्रालय से भ्रष्टाचार के मामले में बहुत कम सजा कराने में सफलता पाई। इसी तरह वीडियो गेम कंपनी रोब्लॉक्स के सीईओ ने भी दान देकर ट्रंप की एआई से जुड़ी नीतियों की तारीफ की। उन्होंने 15 लाख डॉलर से ज्यादा का दान देकर अपने बेटे को फिनलैंड में अमेरिकी राजदूत बनवाया। एक इंजीनियरिंग कंपनी पार्सन्स ने बॉलरूम के लिए 25 लाख डॉलर दिए और वह गोल्डन डोम मिसाइल रक्षा प्रणाली जैसे अरबों के सरकारी ठेकों की दौड़ में है। टेक कंपनी पैलेंटिर ने बॉल रूम को एक करोड़ डॉलर दिए। उसे भी ट्रंप प्रशासन में बड़ सरकारी ठेके मिले।
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दानदाताओं पर शक न करें : व्हाइट हाउस
कई दानदाताओं ने ट्रंप के साथ न सिर्फ व्हाइट हाउस में निजी डिनर किया बल्कि विदेश यात्राएं कीं और सीधे राष्ट्रपति से मुलाकातें कीं। ऐसे 100 दानदाताओं की सूची मिली है। व्हाइट हाउस ने ये सभी आरोप नकारे हंै। वह बोला, राष्ट्रपति का उद्देश्य सिर्फ देश की भलाई है और दान देने वालों को संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। उधर, ट्रंप की टीम अभी और आगे भी फंड जुटाने में लगी है। फिलहाल फ्रीडम-250 नाम से धन जुटाने का नया अभियान शुरू किया गया है। बता दें, धनराशि का एक बड़ा हिस्सा आधा अरब डॉलर से अधिक 346 दानदाताओं से जुड़ा पाया गया, जिनमें से प्रत्येक ने कम से कम 2.50 लाख डॉलर का दान दिया।