पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने शनिवार को खैबर पख्तूनख्वा में सीमा पर कथित तौर पर बिना उकसावे के की गई गोलीबारी के बाद जवाबी कार्रवाई की। इसमें अफगान तालिबान के कई जवान मारे गए। सुरक्षा अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि ताइदा सेक्टर, ऊपरी कुर्रम और घुज गढ़ी इलाकों में गोलीबारी की खबर मिली थी। आरोप है कि अफगान तालिबान ने आतंकवादियों को सीमा पार घुसपैठ कराने में मदद देने के लिए गोलीबारी की।
अधिकारी के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई की। इसमें घुज गढ़ी के सीमा क्षेत्र के पास अफगान तालिबान के कई जवान मारे गए। अपर कुर्रम सेक्टर में पाकिस्तानी बलों ने अफगान तालिबान की टॉपसर चौकी और शिपोला बेस कैंप को निशाना बनाया।
अधिकारी ने दावा किया कि जवाबी कार्रवाई में शिपोला बेस कैंप पूरी तरह नष्ट हो गया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी बलों की कार्रवाई के बाद तालिबान के कई जवान कथित तौर पर अपनी सीमा चौकी छोड़कर भाग गए।
इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में आतंकवादियों के ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने इन्हें सुनियोजित और सावधानीपूर्वक किए गए हमले बताया था। इन हमलों में प्रतिबंधित संगठन फितना अल-खवारिज से जुड़े कई आतंकवादी मारे गए थे।
पाकिस्तान की संघीय सरकार प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों के लिए 'फितना अल-खवारिज' शब्द का इस्तेमाल करती है।
पाकिस्तान में सीमा पार से आतंकवादी हमले बढ़े
2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से पाकिस्तान में सीमा पार से होने वाले आतंकवादी हमलों में तेज बढ़ोतरी हुई है। खासकर खैबर पख्तूनख्वा (केपी) और बलूचिस्तान में ऐसे हमले बढ़े हैं।
पाकिस्तान में सितंबर 2026 में पिछले 12 वर्षों के दौरान एक महीने में आतंकवादी हमलों की सबसे अधिक संख्या दर्ज की गई।
इस्लामाबाद स्थित स्वतंत्र थिंक टैंक पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (पीआईसीएसएस) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में पूरे देश में 225 हमले दर्ज किए गए। अगस्त में यह संख्या 199 थी। इस तरह हमलों में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
लगातार तीसरे महीने आतंकवादी हमलों की संख्या बढ़ी
पाकिस्तान ने फरवरी 2026 में 'ऑपरेशन गजब लिल-हक' शुरू किया था। इससे कुछ महीने पहले अक्तूबर 2025 में, सीमा के कई स्थानों पर झड़पों के बाद दोनों देशों ने युद्धविराम पर सहमति जताई थी।
कई दौर की बातचीत के बावजूद इस्लामाबाद और काबुल के बीच मतभेद दूर नहीं हुए हैं। दोनों देशों के बीच विवाद की एक बड़ी वजह यह आरोप है कि आतंकवादी संगठन अफगानिस्तान की जमीन से अपनी गतिविधियां चला रहे हैं।