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नीरव मोदी को बड़ा झटका: ब्रिटिश कोर्ट का आदेश- बैंक फ्रॉड मामले में 100 करोड़ से अधिक भुगतान करना होगा

Wed, 24 Jun 2026 07:19 AM IST
Jyoti Bhaskar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।

सार

लंदन की एक अदालत ने बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में फैसला सुनाया है। मामला भारत के भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी से जुड़ा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद नीरव मोदी को 100 करोड़ रुपये से अधिक राशि लौटानी पड़ेगी। विदेशी मुद्रा में ये बकाया राशि करीब 10.7 मिलियन डॉलर होगी।
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नीरव मोदी को लंदन की कोर्ट से लगा झटका - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत के भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को ब्रिटिश कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब नीरव मोदी को बैंक फ्रॉड मामले में 100 करोड़ से अधिक भुगतान करना होगा। हाईकोर्ट के न्यायाधीश साइमन टिंकलर ने नीरव को व्यक्तिगत गारंटी के तहत देनदार ठहराया। खबरों के मुताबिक नीरव पर 4.1 मिलियन डॉलर (लगभग 38.9 करोड़ रुपये) की मूल राशि बकाया है। बैंक इसमें निर्धारित ब्याज भी जोड़ेगा।

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हाईकोर्ट में नीरव मोदी के तर्क क्या?
रिपोर्ट्स के मुताबिक मंगलवार को (ब्रिटिश टाइम) हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नीरव या उनके वकील ने अपने बचाव में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। नीरव ने तर्क दिया था कि गारंटी लागू करने योग्य नहीं थी। उसने बैंक से वैध मांगें कभी प्राप्त नहीं की थीं। बैंक ऑफ इंडिया ने जुलाई 2012 में नीरव की कंपनी फायरस्टार डायमंड एफजेडई को दुबई में कर्ज दिया था। नीरव ने 3 अगस्त 2013 को इसकी व्यक्तिगत गारंटी दी थी।

कर्ज वापसी की प्रक्रिया क्या होगी?
2018 की शुरुआत में, जब नीरव द्वारा पंजाब नेशनल बैंक में कथित धोखाधड़ी की खबर फैली, तो बैंक ऑफ इंडिया ने कर्ज वापस मांगने का फैसला किया। मार्च और अप्रैल 2018 में फायरस्टार और नीरव को भेजे गए नोटिस का जवाब नहीं मिला। 8 मार्च 2024 को बैंक ऑफ इंडिया ने 4.1 मिलियन डॉलर की मूल राशि और ब्याज के लिए सारांश निर्णय प्राप्त किया। बैंक ने अक्तूबर 2025 में नीरव को एक और मांग भेजी। न्यायाधीश टिंकलर ने कहा कि फरवरी 2018 से फायरस्टार समूह की हर कंपनी प्रभावित हुई थी।
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गारंटी की वैधता पर हाईकोर्ट के फैसले में क्या?
न्यायाधीश टिंकलर ने बताया कि 17 फरवरी 2018 को नीरव ने बैंक को ईमेल भेजा था। इसमें उसने मीडिया की हलचल से संचालन बंद होने की बात कही थी। उसने समूह की बैंकों को बकाया चुकाने में असमर्थता भी बताई थी। नीरव ने अप्रैल 2018 और अक्तूबर 2025 की मांगें मिलने से इन्कार किया। हालांकि, टिंकलर संतुष्ट थे कि दोनों मांगें उसे प्राप्त हुई थीं और उन्होंने गारंटी को लागू करने योग्य पाया।

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