अपराध की दुनिया की एक ऐसी शख्सियत जो तमाम देशों को चकमा देने, 20 से ज्यादा हत्या का आरोपी, गिरफ्तारी और फरारी का खेल खेलने और जेल में भी ऐश करने के लिए मशहूर रहा है, वह एक बार फिर जेल से बाहर आने वाला है। जी हां, हम बात कर रहे हैं नेपाल की जेल में बंद चार्ल्स शोभराज की।
चार्ल्स शोभराज 76 साल का हो चुका है और ज्यादा उम्र का होने की वजह से नेपाल के एटॉर्नी जनरल ने वरिष्ठ नागरिक कानून के तहत ऐसे कैदियों की सजा माफ करने और जेल से रिहा करने की सिफारिश की है। एटॉर्नी जनरल अग्नि खरेल ने जिन 13 कैदियों को ज्यादा उम्र होने की वजह से रिहा कर देने की सिफारिश की है उनमें चार्ल्स शोभराज भी है।
नेपाल के एटॉर्नी जनरल ऑफिस के प्रवक्ता संजीब राज रेग्मी के मुताबिक नेपाल के वरिष्ठ नागरिक कानून के तहत यह सरकार की मर्जी पर है कि वह ऐसे उम्रदराज कैदियों की सजा माफ करे या न करे। सजा माफ करने की ये भी शर्त है कि ऐसे कैदी समाज के लिए कोई खतरा न पैदा करें। एटॉर्नी जनरल के दफ्तर से ऐसी सिफारिशें सरकार को भेजी जाती हैं जो कानून के तहत जायज होती हैं। इन 13 उम्रदराज कैदियों के मामले में भी इसी कानून के प्रावधानों को ध्यान में रखा गया है।
गौरतलब है कि तीन साल पहले 2017 में काठमांडू के एक अस्पताल में शोभराज की ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी और जेल में उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा है। नेपाल के एक जेल में लंबे समय से बंद शोभराज पर भारत, थाईलैंड, नेपाल, तुर्की और ईरान में हत्या के 20 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। उसे सीरियल किलर भी कहा जाता रहा है और बिकनी किलर भी।
हालांकि 2004 में चार्ल्स शोभराज को ऐसे किसी भी मामले में दोषी नहीं ठहराया जा सका। चार्ल्स शोभराज वेष बदलने और युवा महिलाओं को निशाना बनाने में माहिर माना जाता रहा है और थ्रिलर फिल्में बनाने वाले फिल्मकारों का वह प्रिय पात्र भी रहा है।
आपको डॉन फिल्म का वो डॉयलॉग याद होगा – ‘डॉन का इंतजार तो 11 मुल्कों की पुलिस कर रही है’। जी हां, ये मशहूर डॉयलॉग भी शोभराज की ज़िंदगी से ही लिया गया था। ‘मैं और चार्ल्स’ नाम की फिल्म भी उसी के किरदार को केन्द्र में रख कर बनाई गई। जाहिर है 70 के दशक और उसके बाद से चार्ल्स शोभराज एक किंवदंती की तरह ही याद किया जाता है।
गिरफ्तारी और फिर जेल से भागने के दिलचस्प रास्ते तलाशने में माहिर रहा शोभराज भारत के अलावा, ग्रीस, अफगानिस्तान और ईरान की जेलों से भी भाग चुका है। फ्रांस के पर्यटकों को जहर देने के मामले में भारत में उसे 20 साल की सजा हुई थी।
वियतनाम के साइगॉन में 1944 में जन्मे चार्ल्स शोभराज की मां वियतनामी थी जबकि पिता भारतीय। तब वियतनाम पर फ्रांस का कब्ज़ा था, इसलिए शोभराज को फ्रंसीसी नागरिकता दी गई थी। जन्म के बाद ही पिता ने उसे अपनाने से इंकार कर दिया। उसकी आत्मकथा के मुताबिक इसी गुस्से में चार्ल्स ने अपराध की दुनिया में कदम रखा और बेहद शातिराने दिमाग के साथ तमाम एशियाई देशों में अपराध करता रहा। तस्करी से लेकर हत्याएं तक।
1971 में जेल से भागने के लिए उसने एपेंडिक्स के दर्द का बहाना किया और अस्पताल से भाग निकला। 1976 में दोबारा गिरफ्तार हुआ लेकिन कुछ ही समय बाद जेल में जन्मदिन पार्टी करके तमाम पुलिसवालों और कैदियों को नशीला खाना खिलाकर बेहोश करके शान से जेल से फरार हो गया। चार्ल्स को खुद पर इतना आत्मविश्वास रहा है कि वह अक्सर कहता था कि अगर उसने किसी से बातचीत कर ली, तो वह उसे अपने प्रभाव में जरूर ले आएगा।
फिलहाल चार्ल्स शोभराज 2004 से नेपाल की जेल में बंद है और अब उम्रदराज होने की वजह से उसकी बाकी सजा माफ कर देने और रिहा करने की सिफारिश की गई है। अगर नेपाल सरकार वरिष्ठ नागरिक कानून के तहत उसकी सजा माफ कर देती है, तो एक बार फिर चार्ल्स शोभराज दुनिया के सामने आंख-मिचौली खेलने के लिए मैदान में होगा।