रिपोर्ट के अनुसार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) उत्तरी सिनाई में सक्रिय है। जो मिस्र के सुरक्षा बलों और अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय पर आतंकी हमलों की जिम्मेदारी लेता रहा है। कुछ दिन पहले ही सिनाई में छह नागरिकों के सिर कलम कर दिए गए हैं। कहा गया कि हमलावरों ने तीन और लोगों का अपहरण कर लिया था और रेगिस्तान में भाग गए। बाद में मिस्र की वायुसेना ने घोषणा की कि उसने 20 आईएस समर्थकों को मार दिया है।
एसडब्ल्यूपी के विशेषज्ञ का कहना है कि सिनाई में सुरक्षा सुनिश्चित हो पाना काफी मुश्किल है। इस क्षेत्र में समाचार ब्लैकआउट है और किसी तरह की कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। विशेषज्ञ ने कहा कि यहां से खबरें आती रहती हैं, आतंकियों को मारने की लेकिन क्या वो सभी आतंकी हैं। ये साफ नहीं है। केवल इतना ही नहीं देश के सुरक्षा बलों की भी मौत हुई हैं, लेकिन ये बात साफ है कि उत्तरी सिनाई में स्थिति नियंत्रण में नहीं है।
मानव अधिकारों का उल्लंघन
मानव अधिकार संगठन मिस्र की पुलिस और सेना की आलोचना करते हुए कहते हैं कि ये नागरिक हताहतों की परवाह किए बिना आतंक रोधी अभियान चलाते हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने माना है कि यहां मनमाने ढंग से गिरफ्तारी, असाधारण हत्या, सामूहिक दंड, निष्कासन और गायब होना आदि होता है। जिससे अपराधों को और भी बढ़ावा मिलता है।
एचआरडब्ल्यू के मुताबिक 2014 से जून 2018 के बीच 300 से अधिक कथित इस्लामवादियों और 1200 सुरक्षा बलों की लड़ाई के दौरान मौत हुई है। जांचकर्ताओं का कहना है कि मिस्र के अधिकारियों ने विद्रोहियों के रूप में सैकड़ों घायल या मारे गए नागरिकों को गलत तरीके से सूचीबद्ध किया है। 12 हजार से अधिक गिरफ्तारियां भी हुई हैं।