तुर्किये मीडिया के अनुसार, 24 मई को विदेशी मतदान किए गए थे। रविवार को मतदान वहां के समयानुसार, शाम पांच बजे तक चलेंगे। दूसरे चरण के मतदान से पहले राष्ट्रपति एर्दाेगन ने कहा था कि देश और बच्चों के भविष्य के लिए मजबूत विकल्प चुनना होगा।
तुर्किये में दूसरे चरण का राष्ट्रपति चुनाव रविवार को जारी है। लंबे समय से सत्ता में काबिज रेसेप तैयप एर्दोगन और विपक्षी नेता केमल किलिकडारोग्लू राष्ट्रपति चुनाव में दौड़ रहे हैं। रविवार को हो रहे मतदान के लिए कुल 191,885 मतपेटियां लगाई गई हैं। देश में कुल 6.4 करोड़ मतदाता रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 19 लाख से अधिक विदेशी लोगों ने पहले ही मतदान कर दिया है।
भविष्य के लिए मजबूत विकल्प चुनना होगा
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तुर्किये मीडिया के अनुसार, 24 मई को विदेशी मतदान किए गए थे। रविवार को मतदान वहां के समयानुसार, शाम पांच बजे तक चलेंगे। इसके पहले 14 मई को राष्ट्रपति चुनाव का पहला चरण आयोजित किया गया था। दूसरे चरण के मतदान से पहले राष्ट्रपति एर्दाेगन ने कहा था कि देश और बच्चों के भविष्य के लिए मजबूत विकल्प चुनना होगा। वहीं विपक्षी नेता केमल ने कहा कि पहली बार देश को दो उम्मीदवारों और दो विचारों के बीच किसी एक को चुनना होगा। बता दें, 29 अक्टूबर को तुर्किए को अस्तित्व में आए 100 साल पूरे हो जाएंगे। इसके लिए एर्दोगन ने तुर्की की सदी नाम से देश की रणनीति तैयार की है। चुनावों के बाद कार्यक्रम शुरू करने की योजना बनाई गई थी।
एर्दोगन ने आखिरी चुनावी रैली में विपक्ष को घेरा
अपने आखिरी रैली में एर्दोगन ने विपक्ष पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष को पश्चिमी देशों से आदेश दिया जा रहा है। यदि उनकी सरकार बनती है तो वे पश्चिमी देशों की इच्छाओं के आगे झुक जाएंगे। विश्लेषकों ने अनुमान लगाया कि राष्ट्रपति की दौड़ में एर्दोगन, मुख्य विपक्षी उम्मीदवार केमाल किलिकदारोग्लु और रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी और छह पार्टी राष्ट्र गठबंधन के लिए उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर होने वाली है।
भूकंप से एर्दोगन के गढ़ को हुआ था ज्यादा नुकसान
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तुर्किये के उप विदेश मंत्री ने बताया कि विदेशों में रहने वाले तुर्की के लोगों ने पहले ही मतदान कर लिया है। बताया जा रहा है कि इस साल फरवरी में आए भूकंप में जिन क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा था, उनमें से अधिकतर इलाका राष्ट्रपति एर्दोगन का गढ़ था। राष्ट्रपति की दौड़ में एर्दोगन और किलिकदरोग्लु के अलावा राइट विंग एंसेस्ट्रल अलाइंस के उम्मीदवार सिनान ओगन भी शामिल है। वहीं सेंट्रिस्ट होमलैंड के उम्मीदवार इंस ने बताया कि उनके खिलाफ चलाए गए बदनामी अभियान के बाद उन्होंने इस दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया था। वे तुर्की के सोशल मीडिया पर हफ्तो तक झूठे आरोपो का सामना करते रहे। साल 2018 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव की रेस में शामिल हुए थे लेकिन एर्दोगन के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।