भारत और अमेरिका के संबंधों को और मजबूती देने के लिए दूसरी टू प्लस टू वार्ता भारतीय समयानुसार बुधवार देर रात वाशिंगटन में शुरू हुई। इस दौरान दोनों देशों के रक्षा और विदेश मंत्रियों ने सामरिक साझेदारी सहित द्विपक्षीय रिश्तों को आगे ले जाने मंथन किया।
भारत की ओर से बैठक में पहुंचे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर का अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान दोनों देशों के संबंधित मंत्रालयों के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद थे। अमेरिकी विदेश मंत्री पोम्पियो ने ट्वीट किया, 2019 में दोनों देशों के बीच सामरिक साझेदारी के क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ। हम इन संबंधों की कामयाबी की समीक्षा कर इन्हें आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई चार दौर की वार्ता में लिए गए फैसलों की समीक्षा के साथ ही 2020 के लिए एजेंडे पर भी चर्चा हुई। बैठक से पूर्व राजनाथ और जयशंकर ने अपने समकक्षों के साथ अलग बैठक की। बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने कहा, अमेरिकी रक्षामंत्री के साथ मुलाकात बहुत अच्छी रही। हमने रक्षा क्षेत्र में सहयोग और साझा हितों को बढ़ाने पर बात की।
चीनी गतिविधियों ने बढ़ाई चिंता
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ रही सैन्य गतिविधियों पर चिंता जताते हुए अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर चार देशों का संगठन (क्वास्ड) बनाया है। पोम्पियो ने इस साल सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में पहली बार क्वास्ड की मेजबानी की थी। इसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दिखाई गई थी।
दिल्ली में हुई थी पहली बैठक
पिछले साल सितंबर में भारत और अमेरिका के बीच पहली बार राजधानी नई दिल्ली में टू पल्स टू वार्ता हुई थी। इसमें तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो शामिल हुए थे।
अमेरिका चाहता है शुल्क घटाए भारत
अमेरिका चाहता है कि भारत उसके उत्पादों पर टैरिफ टैरिफ (शुल्क) कम करे। व्हाइट हाउस के व्यापार और आर्थिक सलाहकार पीटर नवारो ने बुधवार को कहा, भारत को टैरिफ का ऽमहाराजाऽ बताते हुए कहा कि भारत को अपने रुख में बदलाव लाना चाहिए।
व्हाइट हाउस की व्यापार और विनिर्माण नीति के प्रमुख नवारो ने कहा कि एक अध्ययन के मुताबिक करीब 90 फीसदी बार ऐसा पाया गया कि अमेरिका की तुलना में ज्यादा शुल्क लगाता है। मैं ऐसे ही नहीं कहता कि भारत टैरिफ लगाने के मामले में महाराजा है और दुनिया में सबसे ज्यादा शुल्क लेता है।