एक और संघीय न्यायाधीश ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को रोक दिया, जिसका उद्देश्य 19 वर्ष से कम उम्र के ट्रांसजेंडरों के लिए लिंग-पुष्टि स्वास्थ्य देखभाल को प्रतिबंधित करना था।
वाशिंगटन, ओरेगन और मिनेसोटा के डेमोक्रेटिक अटॉर्नी जनरल ने पिछले सप्ताह ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। इसके बाद, यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के न्यायाधीश लॉरेन किंग ने एक अस्थायी आदेश जारी किया। वाशिंगटन के पश्चिमी जिले में दायर किए गए इस मुकदमे में तीन डॉक्टर भी वादी के रूप में शामिल हुए।
एक दिन पहले बाल्टीमोर में संघीय न्यायाधीश ने रोका आदेश
यह फैसला बाल्टीमोर में संघीय न्यायाधीश ब्रेंडन हर्सन द्वारा कार्यकारी आदेश पर रोक लगाए जाने के एक दिन बाद आया है, जिसमें ट्रांसजेंडर या नॉनबाइनरी बच्चों वाले परिवारों की ओर से एक अलग मुकदमा दायर किया गया था। न्यायाधीश हर्सन का अस्थायी आदेश 14 दिनों तक चलेगा, लेकिन इसे बढ़ाया जा सकता है।
शपथ ग्रहण के कुछ समय बाद ट्रंप ने आदेश पर किए हस्ताक्षर
डोनाल्ड ट्रंप ने शपथ ग्रहण करने के कुछ समय बाद, एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें संघीय स्तर पर संचालित बीमा कार्यक्रमों को लिंग-पुष्टि देखभाल की कवरेज को बाहर करने का निर्देश दिया गया। इसमें मेडिकेड और सैन्य परिवारों के लिए TRICARE शामिल है। ट्रंप के आदेश ने न्याय विभाग से इस नीति का विरोध करने के लिए मुकदमेबाजी और कानून को सख्ती से आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
ट्रंप के आदेश से मेडिकेड कार्यक्रम की प्रथा हो सकती है समाप्त
कुछ राज्यों में मेडिकेड कार्यक्रम लिंग-पुष्टि देखभाल को कवर करते हैं। ट्रंप का आदेश से यह प्रथा समाप्त हो सकती है, और उन अस्पतालों और विश्वविद्यालयों को लक्षित करती है जो संघीय धन प्राप्त करते हैं और देखभाल प्रदान करते हैं।
ट्रंप प्रशासन ने दावों को किया खारिज
सिएटल में दायर शिकायत में, डेमोक्रेटिक अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह आदेश समान अधिकारों और राज्यों की शक्तियों का उल्लंघन करता है। वहीं, ट्रंप प्रशासन ने इन दावों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि राष्ट्रपति को अपने एजेंडे को लागू करने का अधिकार है।
ट्रंप ने इन आदेशों पर भी किए हस्ताक्षर
राष्ट्रपति ट्रंप ने अन्य आदेशों पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जो ट्रांसजेंडर लोगों को सैन्य सेवा से प्रतिबंधित करने, स्कूलों में लिंग शिक्षा के नियम तय करने और ट्रांसजेंडर एथलीटों को लड़कियों के खेल में भाग लेने से रोकने की कोशिश करते हैं।