चीन के एक भू-राजनीति मामलों के विशेषज्ञ ने कहा कि तियानजिन में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की बैठक, अमेरिका के लिए एक कड़ा संदेश है। उन्होंने ये भी कहा कि अमेरिका, भारत या अन्य देशों पर धौंस नहीं जमा सकता।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को चीन के तियानजिन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की निगाहें रहीं। दरअसल दोनों नेताओं की मुलाकात ऐसे समय हुई, जब अमेरिका की ट्रंप सरकार की टैरिफ नीति ने पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल पुथल मचाई हुई है। एक चीनी भू-राजनीतिक विशेषज्ञ ने पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात को ऐतिहासिक बताया और कहा कि यह अमेरिका लिए एक कड़ा संदेश है।
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'भारत को कमतर आंकना ठीक नहीं'
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ताइहे इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो एइनार टैंगन ने कहा कि 'राष्ट्रपति ट्रंप भारत को मजबूर करना चाहते थे, लेकिन भारत जैसे देश को, जो बाजारों और श्रम के लिए इतना महत्वपूर्ण है, उसे कमतर आंकना, मुझे नहीं लगता कि यह ठीक है।' उन्होंने सुझाव दिया कि नई दिल्ली के पास इस धौंस जमाने वाले देश का सामना करने का अवसर है।
पीएम मोदी और जिनपिंग की बैठक को बताया अहम
टैंगन ने एनडीटीवी पर एक पैनल चर्चा के दौरान कहा कि 'पीएम मोदी और शी जिनपिंग की यह बैठक केवल भारत और चीन के बारे में नहीं थी, बल्कि कई देशों की चिंताओं के बारे में भी थी, जो अमेरिका के टैरिफ से परेशान हैं।' उन्होंने कहा कि 'यह अहम पल है, जो वाशिंगटन को भारत के प्रति उसके मनमाने व्यवहार के लिए एक कड़ा संदेश देता है।' टैंगन ने कहा, 'अमेरिका, भारत पर दबाव बनाना चाहता है। उसे चिंता है कि भारत गुटनिरपेक्ष दुनिया का नेतृत्व कर सकता है और अमेरिका को बता सकता है कि आप हमारे साथ औपनिवेशिक खेल नहीं खेल सकते और हमें चीन, रूस और कई अन्य देशों सहित एक-दूसरे के खिलाफ नहीं खड़ा कर सकते।'
अमेरिका ने रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, जिसके बाद भारत पर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो गया है। भारत ने इसे अनुचित बताया है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ट्रंप, भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम का श्रेय न देने के लिए भारत से नाराज हैं और टैरिफ नीति के पीछे ये भी एक बड़ी वजह है।