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वैज्ञानिकों ने कोविड-19 के एक और नए प्रकार का पता लगाया, फिनलैंड में मिला कोरोना का नया स्ट्रेन

Fri, 19 Feb 2021 12:32 AM IST
देव कश्यप वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हेलसिंकी

सार

  • कोरोना के इस नए स्ट्रेन का अस्थाई नाम फिन-796 एच दिया गया है और अब तक इस नए स्ट्रेन का सिर्फ एक मामला सामने आया है।
  • फिनलैंड के विशेषज्ञों ने जिस नए वेरिएंट का पता लगाया, वे उसे कोरोना के दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन के म्यूटेशन का संयोजन मान रहे हैं।
  • ब्रिटिश वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे लेकर अभी घबराने की कोई वजह नहीं है।
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कोरोना के एक और नए प्रकार का पता चला (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock
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विस्तार
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साल 2019 के अंत में चीन से पूरी दुनिया में फैले कोरोना वायरस ने 2020 में वैश्विक महामारी का रूप ले लिया और अब उस वायरस के नए प्रकार (स्ट्रेन) सामने आ रहे हैं। जिससे दुनिया के सामने चिंता की नई दीवारें खड़ी हो गई हैं।

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यूनाइटेड किंगडम (यूके) में सामने आए पहले के मुकाबले अधिक संक्रामक स्ट्रेन ने लोगों में दहशत फैलाई इसके बाद दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में सामने आए कोरोना स्ट्रेन भी पांव पसारने लगे हैं। इसी बीच वैज्ञानिकों ने कोरोना के एक और नए वेरिएंट का पता लगया है। कोरोना का यह नया स्ट्रेन फिनलैंड में पाया गया है, जो दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन का उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) माना जा रहा है। यह स्ट्रेन टीकों के प्रभाव को भी कम कर रहा है। 
 



फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने इस नए स्ट्रेन का अस्थाई नाम फिन-796 एच दिया है और अब तक इस नए स्ट्रेन का सिर्फ एक मामला सामने आया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना  है कि वे इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि यह कितने बड़े पैमाने पर लोगों के बीच फैल रहा है। इसके साथ ही इस नए स्ट्रेन को दक्षिण अफ्रीका में मिले नए स्ट्रेन के म्यूटेशन का संयोजन माना जा रहा है।
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फिनलैंड के विशेषज्ञों का मानना है कि देश में कोरोना के कम संक्रमण दर को देखते हुए इस वेरिएंट के उभरने की संभावना नहीं थी। बता दें कि स्कैंडिनेवियाई देश (स्केंडिनेविया प्रायद्वीप) में कोरोना के अब तक केवल 51,000 मामले दर्ज किए गए हैं और 700 लोगों की मौत हुई है।

नया वेरिएंट केंट और दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन का म्यूटेशन
कोरोना के इस नए स्ट्रेन का पता लगाने वाले फिनलैंड के शोधकर्ताओं का कहना है कि 'इस नए वेरिएंट में 'केंट स्ट्रेन' और 'दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन' में देखे गए कुछ म्यूटेशन मिले हैं, लेकिन उन्होंने दोनों स्ट्रेन के इस संयोजन (combination) को 'अद्वितीय' करार दिया है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि किस तरह का म्यूटेशन हुआ है, लेकिन कहा कि उन बदलावों के बारे में पता लगाया जा रहा है जो नए स्ट्रेन को अधिक संक्रामक या प्रतिरक्षा-प्रतिरोधी बनाते हैं।

ब्रिटिश वैज्ञानिक बोले- घबराने की जरूरत नहीं
वहीं ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने कहा कि इस नए स्ट्रेन के उभरने से घबराने की कोई बात नहीं है। रीडिंग विश्वविद्यालय के एक संक्रामक रोग शोधकर्ता डॉ. साइमन क्लार्क ने बताया कि 'अभी तक चिंता करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं।' यह दक्षिण अफ्रीकी B.1.351 संस्करण के तेजी से परीक्षण के दौरान सामने आया है- जो शरीर की एंटीबॉडी के साथ-साथ प्रतिरक्षा तंत्र को थोड़ा कम प्रभावी बनाता है।

ब्रिटेन के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने खुलासा किया है कि उत्परिवर्ती स्ट्रेन (म्यूटेंट स्ट्रेन) के 18 नए मामले सामने आए हैं, इसके साथ ही ब्रिटेन में ऐसे मामलों की कुल संख्या 235 हो गई है।

कोरोना वायरस का केंट स्ट्रेन 70 फीसदी ज्यादा खतरनाक- ब्रिटिश शोध
ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने कहा कि दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस के अन्य स्ट्रेन की अपेक्षा केंट वेरिएंट 30 से 70 फीसदी ज्यादा घातक है। इस शोध में केंट वेरिएंट की अपेक्षा अन्य कोरोना स्ट्रेन से पीड़ित मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने और उनके मौत की दर की तुलना की गई है। ब्रिटिश विशेषज्ञ डेविड स्ट्रेन ने कहा कि इस शोध के परिणाम चिंता में डालने वाले हैं। कोरोना के इस नए स्ट्रेन को केंट इलाके में पाया गया था, इसलिए इसका नाम केंट वेरिएंट रखा गया है।

कितना खतरनाक है दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन
वैज्ञानिकों को अभी ऐसा कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है, जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि यह वायरस पहले के मुकाबले और अधिक गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है या मृत्यु का जोखिम बढ़ा सकता है। हालांकि, कहा जा रहा है कि यह यूके स्ट्रेन से भी अधिक संक्रामक है। 

प्रतिरक्षा तंत्र को भी 'धोखा' दे सकता है
दक्षिण अफ्रीका में सामने आए कोरोना वायरस के स्ट्रेन को लेकर बीते दिनों वैज्ञानिकों ने एक चेतावनी जारी की थी। वैज्ञानिकों ने कहा था कि एक नए शोध में पता चला है कि यह स्ट्रेन शरीर की एंटीबॉडी के साथ-साथ प्रतिरक्षा तंत्र को भी 'धोखा' दे सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार शोध में सामने आया है कि इस वायरस के बाहरी स्पाइक प्रोटीन के एक विशिष्ट भाग पर कुछ खास उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) हुए हैं। यही म्यूटेशन इसे एंटीबॉडी से बचने में सक्षम बनाते हैं। 

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