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मौत के बाद जीवन: वैज्ञानिकों ने जाम्बी कोशिकाओं को किया जिंदा, जीनोम ट्रांसप्लांट के जरिये असंभव को किया संभव

Sat, 28 Mar 2026 07:38 AM IST
Shubham Kumar अमर उजाला नेटवर्क

सार

वैज्ञानिकों ने मृत बैक्टीरिया कोशिकाओं को फिर से सक्रिय करने में सफलता पाई है। नई तकनीक में एक जीव का पूरा जीनोम मृत कोशिकाओं में डालकर उन्हें जीवित किया गया। इन कोशिकाओं ने नया जीनोम मिलने के बाद काम करना शुरू किया और वैज्ञानिकों ने इन्हें जाम्बी कोशिकाएं नाम दिया। 

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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क्या मृत कोशिकाओं को फिर से जिंदा कर उनसे दवाएं, बायोफ्यूल और उपयोगी रसायन बनवाए जा सकते हैं? वैज्ञानिकों ने इस सवाल का चौंकाने वाला जवाब दिया है। एक नई तकनीक में मृत बैक्टीरिया कोशिकाओं में दूसरे जीव का जीनोम डालकर उन्हें जीवित कर दिया है। इस महीने प्रीप्रिंट सर्वर बायोआरएक्सआईवी पर प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने एक बैक्टीरिया प्रजाति का पूरा जीनोम दूसरी निष्क्रिय यानी मृत कोशिकाओं में डालकर उन्हें सक्रिय कर दिया।

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ये कोशिकाएं पहले खुद से काम करने में असमर्थ थीं, लेकिन नया जीनोम मिलते ही उन्होंने कार्य करना शुरू कर दिया। वैज्ञानिकों ने इन्हें जाम्बी कोशिकाएं नाम दिया है। यह तकनीक सूक्ष्मजीवों को नए गुण देने का एक शक्तिशाली तरीका बन सकती है, जिससे विशेष कामों के लिए डिजाइन किए गए माइक्रोब तैयार किए जा सकेंगे।

फॉल्स पॉजिटिव की समस्या और नया समाधान
पिछले प्रयासों में बड़ी समस्या फॉल्स पॉजिटिव की थी, जहां कोशिकाएं बिना पूरा जीनोम लिए भी एंटीबायोटिक प्रतिरोध हासिल कर लेती थीं। इससे यह तय करना मुश्किल हो जाता था कि ट्रांसप्लांट वास्तव में सफल हुआ या नहीं।
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जॉम्बी कोशिकाओं का जन्म
लेख के सह-लेखक जुमरा पेक्साग्लाम साइडल के अनुसार कोशिका मरने के लिए बनी होती है, लेकिन हम उसे जीवन दे देते हैं। इसे एक अहम अवधारणा के रूप में देखा जा रहा है। वैज्ञानिक अभी यह पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि यह प्रक्रिया मायकोप्लाज्मा प्रजातियों में इतनी प्रभावी क्यों है। अमेरिकी वैज्ञानिक एलिजाबेथ स्ट्राइचाल्स्की का कहना है कि इस रहस्य को समझना जरूरी है।
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