पूरी दुनिया के वैज्ञानिक कोरोनावायरस का टीका विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ टीकों का जानवरों पर परीक्षण भी हुआ है, लेकिन फिर भी इसमें काफी समय लगेगा। विकसित टीके के असर के बारे में अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। यह भी संभव है कि कोरोनावायरस के जिम्मेदार विषाणु की प्रकृति बदल जाए, जैसा फ्लू के मामले में होता है।
वैज्ञानिक हर साल फ्लू के टीके में बदलाव करते हैं ताकि सबसे ज्यादा संक्त्रस्मित करने वाले विषाणुओं से सुरक्षा हो सके, लेकिन कोई भी टीका पूरी तरह बचाव करने में सक्षम नहीं है।
साल भर रह सकता है असर
कोरोनावायरस परिवार के विषाणु सर्दियों में ज्यादा फैलते हैं। वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी के डॉ विलियम शेफनर ने कहा कि श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाले विषाणु आम तौर पर मौसमी होते हैं, लेकिन हर विषाणु ऐसा नहीं होता। अब देखना यह है कि गर्मी बढ़ने के साथ इसका संक्त्रस्मण रुकता है या नहीं। समस्या यह है कि उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों में अलग-अलग समय पर सर्दियों का मौसम आता है। कोरोनावायरस केवल सर्दियों में भी फैला तो पूरे साल इसका असर बना रह सकता है।