कोरोना संक्रमण को मात देने वाले मरीज भले ही वायरस से मुक्त हो गए हैं। लेकिन लंबे समय तक उन्हें थकान, कमजोरी और सांस लेने की तकलीफ रह सकती है। यह बात वैज्ञानिकों ने ब्रिटेन में हाल ही में हुई साइंटिफिक एडवाइजरी ग्रुप फॉर इमरजेंसी (एसएजी) और सरकार की बैठक में कही।
वैज्ञानिकों का कहना है कि जिनका इलाज आईसीयू में चला या चल रहा है, उनके फेफड़ों और दूसरे अंगों को नुकसान की आशंका ज्यादा है क्योंकि वायरस किस तरह से शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है इसकी अभी तक पुष्टि नहीं हुई है।
ब्रिटेन में हाल ही में साइंटिफिक एडवाइजरी ग्रुप फॉर इमरजेंसी (एसएजी) और सरकार की हुई बैठक हुई थी। बैठक में करीब 50 लोग शामिल हुए थे। जिसमें ब्रिटेन सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार सर पैट्रिक वैलेंस और प्रोफेसर कि्श पिट्टी थे। वैज्ञानिकों ने बताया कि संक्रमित मरीजों में स्ट्रोक और किडनी संबंधी रोग की भी आशंका बढ़ गई है। ऐसे में जांच और निगरानी के लिए अलग व्यवस्था बनानी होगी।
वहीं एक वैज्ञानिक ने यह भी कहा है कि कोरोना से ठीक हो चुके लोगों को सामान्य जीवन में लौटने में वक्त लगेगा। संभव है कि वह पहले जैसी दिनचर्या ना कर पाए। कोरोना वायरस कब खत्म होगा यह किसी को नहीं पता इसी को लेकर हर कोई वहां चिंतित दिखा।
सबसे चुनौतीपूर्ण यह है कि वायरस को मात देने वाले लोगों को बाद में भी कोई तकलीफ रह सकती है। इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिनका इलाज आईसीयू में चला या चल रहा है। उनके फेफड़ों और दूसरे ने अंगों को नुकसान की आशंका ज्यादा है। क्योंकि वायरस किस तरह से शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है यह अपुष्ट है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, ठीक हो चुके व्यक्तियों को दोबारा संक्रमण नहीं होगा यह भी स्पष्ट नहीं है। संभव है कि दोबारा संक्रमण हो जाए। हां यह जरूर है कि उसके शरीर में बनी एंटीबॉडीज उसे गंभीर होने से बचा ले या कुछ समय तक संक्रमण की चपेट में आने से बचा ले। पोस्ट कोविड-19 के बारे में अध्ययन की जरूरत है। जिससे पता चले कि वायरस का लंबे समय तक शरीर पर क्या असर पड़ता है।
मनोरोग के मामले में सुनामी की आशंका
मनोचिकित्सकों का कहना है कि कोविड-19 का असर लंबे समय तक दिखेगा। जो संक्रमण की चपेट में नहीं आए और लॉकडाउन में घरों में कैद रहे वह किसी मानसिक विकार का शिकार हो सकते हैं। महामारी से लाखों लोगों की नौकरी गई है।
लोगों का बिजनेस चौपट हो गया है। हजारों घरों में कमाने वाले की मौत से वह तबाह हुए हैं। इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते। क्योंकि इन सब का सीधा संबंध व्यक्ति के मानसिकता से है।