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पिता को हैंडसम बनाने और सख्त छवि को खत्म करने के लिए यहां शुरू हुई अनोखी योजना

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 02 Dec 2018 01:45 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com

अक्सर पिता के बारे में सोचते ही लोगों के दिमाग में सख्त मिजाज वाले पिता की तस्वीर बनने लगती है। वहीं जापान तो इस मामले में सबसे अधिक प्रचलित है। यहां काम में अधिक व्यस्त होने के कारण पिता अपने बच्चों के साथ बेहद कम समय बिता पाते हैं। अब पिता की इस भूमिका को बदलने के लिए यहां सरकार इकुमेन प्रोजेक्ट चला रही है। 

इकुमेन शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। जिसमें इकुजी का मतलब है बच्चों की देखभाल करना और इकेमेन का मतलब है हैंडसम। इस योजना के तहत पिता को मुस्कुराने वाला और हैंडसम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अब देश में इसका ट्रेंड बढ़ता जा रहा है। इस योजना के बाद से पिता की सख्त भूमिका भी बदलती जा रही है। सरकार ने नेशनल इकुमेन प्रोजेक्ट साल 2010 में लांच किया था। आज ये शब्द यहां के समाज का एक अहम हिस्सा बन चुका है। 



80 के दशक में कई बच्चों ने की थी आत्महत्या

जापान में इस योजना को इसलिए भी लांच किया गया क्योंकि यहां पिता की सख्त भूमिका के कारण 80 के दशक में कई बच्चे आत्महत्या कर चुके हैं। उस दशक में पिता औसतन 40 मिनट तक ही बच्चों के साथ समय बिताया करते थे। वो समय भी खाना खाने का होता था। तब पिता को केवल कमाने वाला व्यक्ति ही माना जाता था, जिसका सम्मान बच्चे डर के कारण करते थे। बच्चे पिता के सामने काफी डरे सहमे रहते थे।

पिता बनने पर भी बच्चों से दूर रहते पुरुष

जापान में धीमी विकास दर के कारण साल 2002 में केवल 0.33 फीसदी पुरुषों ने ही पिता बनने पर छुट्टी ली। यह बात एक रिपोर्ट में कही गई है। साल 2008 तक हालात सुधरे, तब तक छुट्टी लेने वाले पिताओं की संख्या में इजाफा हुआ। तब तक पिता बनने पर छुट्टी लेने वाले पुरुषों की संख्या बढ़कर एक तिहाई तक पहुंच गई। अब पिता बच्चों के साथ अधिक समय बिता रहे हैं। उन्हें छुट्टी लेने पर डर लगा रहता था कि कहीं उनके ऐसा करने से उनका बॉस नाराज न हो जाए। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com
अक्सर पिता के बारे में सोचते ही लोगों के दिमाग में सख्त मिजाज वाले पिता की तस्वीर बनने लगती है। वहीं जापान तो इस मामले में सबसे अधिक प्रचलित है। यहां काम में अधिक व्यस्त होने के कारण पिता अपने बच्चों के साथ बेहद कम समय बिता पाते हैं। अब पिता की इस भूमिका को बदलने के लिए यहां सरकार इकुमेन प्रोजेक्ट चला रही है। 

इकुमेन शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। जिसमें इकुजी का मतलब है बच्चों की देखभाल करना और इकेमेन का मतलब है हैंडसम। इस योजना के तहत पिता को मुस्कुराने वाला और हैंडसम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अब देश में इसका ट्रेंड बढ़ता जा रहा है। इस योजना के बाद से पिता की सख्त भूमिका भी बदलती जा रही है। सरकार ने नेशनल इकुमेन प्रोजेक्ट साल 2010 में लांच किया था। आज ये शब्द यहां के समाज का एक अहम हिस्सा बन चुका है। 

80 के दशक में कई बच्चों ने की थी आत्महत्या

जापान में इस योजना को इसलिए भी लांच किया गया क्योंकि यहां पिता की सख्त भूमिका के कारण 80 के दशक में कई बच्चे आत्महत्या कर चुके हैं। उस दशक में पिता औसतन 40 मिनट तक ही बच्चों के साथ समय बिताया करते थे। वो समय भी खाना खाने का होता था। तब पिता को केवल कमाने वाला व्यक्ति ही माना जाता था, जिसका सम्मान बच्चे डर के कारण करते थे। बच्चे पिता के सामने काफी डरे सहमे रहते थे।

पिता बनने पर भी बच्चों से दूर रहते पुरुष

जापान में धीमी विकास दर के कारण साल 2002 में केवल 0.33 फीसदी पुरुषों ने ही पिता बनने पर छुट्टी ली। यह बात एक रिपोर्ट में कही गई है। साल 2008 तक हालात सुधरे, तब तक छुट्टी लेने वाले पिताओं की संख्या में इजाफा हुआ। तब तक पिता बनने पर छुट्टी लेने वाले पुरुषों की संख्या बढ़कर एक तिहाई तक पहुंच गई। अब पिता बच्चों के साथ अधिक समय बिता रहे हैं। उन्हें छुट्टी लेने पर डर लगा रहता था कि कहीं उनके ऐसा करने से उनका बॉस नाराज न हो जाए। 

वर्क-लाइफ बैलेंस हैंडबुक

प्रतीकात्मक तस्वीर
योजना के तहत एक हैंडबुक भी लांच की गई। इस हैंडबुक में लिखा गया कि देश को बचाने के लिए पिताओं की मदद की आवश्यकता है। हैंडबुक में बताया गया कि पिता को परिवार और काम के बीच किस तरह से सामंजस्य स्थापित करना है, उन्हें किस तरह से बेहतर दिखना चाहिए। हैंडबुक में लिखा है कि एक पिता ही इकुमेन समाज की मजबूती है, जो न केवल परिवार की रक्षा करता है बल्कि भविष्य को भी पोषित करता है।

पिता की एक नई छवि

पिता की छवि बदलने के लिए एक मैग्जीन भी निकाली जा रही है, जिसमें पिता और बच्चे को एक जैसे कपड़ों में दिखाया गया है। पिता की छवि के लिए टीवी पर धारावाहिक दिखाए जा रहे हैं। उन्हें सम्मान देने के लिए मिस्टर इकुमेन पेजेंट जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जा रहा है।

महिलाओं के काम करने को सम्मान

इस योजना के शुरू होने के बाद लोगों की सोच पर भी फर्क पड़ा है। पहले यहां 60 फीसदी लोग मानते थे कि पुरुषों को कमाना चाहिए और महिलाओं को घर संभालना चाहिए। वहीं अब ऐसा सोचने वालों की संख्या कम होकर 45 फीसदी रह गई है।
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