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Saudi Warplanes Strike: सऊदी ने यूएई समर्थित अलगाववादियों पर बरसाए बम, हमलों से बढ़ा तनाव; जानें क्या है विवाद

Fri, 02 Jan 2026 06:17 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सना

सार

यमन के दक्षिणी हदरामौत प्रांत में सऊदी अरब के युद्धक विमानों ने यूएई समर्थित अलगाववादी बलों पर हवाई हमले किए। यह कार्रवाई सऊदी समर्थित और अलगाववादी गुटों के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुई। दोनों पक्षों ने पीछे हटने से इनकार किया है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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यमन के दक्षिणी हिस्से में सत्ता और प्रभाव को लेकर तनाव और गहरा गया है। शुक्रवार को सऊदी अरब के युद्धक विमानों ने संयुक्त अरब अमीरात समर्थित अलगाववादी बलों पर हवाई हमले किए। अलगाववादी नेतृत्व के अनुसार, ये हमले हदरामौत प्रांत में हुए, जहां हाल के दिनों में सऊदी समर्थित और यूएई समर्थित गुट आमने-सामने हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इन हमलों में किसी के हताहत होने की तत्काल पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।

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अलगाववादी संगठन साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि सऊदी समर्थित नेशनल शील्ड फोर्सेज ने हदरामौत में स्थित उनके शिविरों की ओर बढ़ने की कोशिश की। STC बलों ने पीछे हटने से इनकार कर दिया, जिसके बाद सऊदी युद्धक विमानों ने हवाई कार्रवाई की। यह प्रांत सऊदी अरब की सीमा से सटा हुआ है और रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है।

हदरामौत में टकराव की पृष्ठभूमि
पिछले महीने एसटीसी ने यमन के हदरामौत और महरा प्रांतों में अपनी मौजूदगी बढ़ाते हुए एक तेल-समृद्ध इलाके पर कब्जा कर लिया था। इस कदम के बाद सऊदी समर्थित नेशनल शील्ड फोर्सेज को पीछे हटना पड़ा। इससे पहले दोनों गुट ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक ही गठबंधन में थे, लेकिन अब दक्षिणी यमन में वर्चस्व को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
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शांतिपूर्ण अभियान का दावा
यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार द्वारा नियुक्त हदरामौत के गवर्नर सालेम अल-खानबाशी ने इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण और एहतियाती कदम बताया। सरकारी मीडिया पर दिए बयान में उन्होंने कहा कि यह कोई युद्ध की घोषणा नहीं है और इसका उद्देश्य केवल हथियारों को हटाना और अराजकता को रोकना है। उनके मुताबिक, शिविरों का इस्तेमाल क्षेत्र की सुरक्षा को कमजोर करने के लिए नहीं होने दिया जाएगा।

सऊदी-यूएई के बीच बढ़ता तनाव
सऊदी अरब के यमन स्थित राजदूत मोहम्मद अल-जाबेर ने आरोप लगाया कि एसटीसी प्रमुख ऐदरूस अल-जुबैदी ने सऊदी मध्यस्थता प्रयासों को लगातार ठुकराया। उन्होंने यह भी कहा कि अलगाववादियों ने सऊदी प्रतिनिधिमंडल के विमान को अदन में उतरने की अनुमति नहीं दी। इससे दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और गहरा गया है।

हवाई यात्रा और प्रतिबंध
इस बीच, एसटीसी से जुड़े यमन के परिवहन मंत्रालय ने दावा किया कि सऊदी अरब ने अदन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से आने-जाने वाली उड़ानों पर नए निरीक्षण नियम थोप दिए हैं, जिसके तहत विमानों की जांच जेद्दा में कराना अनिवार्य किया गया है। मंत्रालय ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि यूएई से आने-जाने वाली सभी उड़ानें फिलहाल निलंबित कर दी गई हैं।
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यमन का लंबा गृहयुद्ध
यमन पिछले एक दशक से अधिक समय से गृहयुद्ध की चपेट में है। उत्तर में ईरान समर्थित हूती विद्रोही बड़े हिस्से पर नियंत्रण बनाए हुए हैं, जबकि दक्षिण में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को सऊदी-यूएई गठबंधन का समर्थन प्राप्त है। हालांकि, यूएई दक्षिणी अलगाववादियों का भी समर्थन करता है, जो दक्षिण यमन को फिर से अलग देश बनाने की मांग कर रहे हैं। 1967 से 1990 तक दक्षिण यमन एक स्वतंत्र देश था। मौजूदा हालात ने इस पुराने विभाजन को एक बार फिर उभार दिया है।


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