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तो क्या ये था पाकिस्तान का असली खेल?: सऊदी अरब ने तीन अरब डॉलर डिपॉजिट बढ़ाया, संकट के बीच मिला आर्थिक सहारा

Fri, 17 Apr 2026 08:28 PM IST
Shivam Garg पीटीआई, कराची

सार

सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ 3 अरब डॉलर की जमा राशि की अवधि बढ़ाने का समझौता किया है। इससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच समझौता (फाइल फोटो) - फोटो : X/@CMShehbaz
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विस्तार
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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को राहत देते हुए सऊदी अरब ने एक बार फिर बड़ा वित्तीय सहयोग दिया है। सऊदी अरब और पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के बीच हुए समझौते के तहत 3 अरब डॉलर की जमा राशि की परिपक्वता अवधि को बढ़ाने पर सहमति बनी है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने इस समझौते की पुष्टि करते हुए बताया कि यह कदम देश के विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखने में मदद करेगा।

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क्या हुआ समझौते में?
सऊदी फंड फॉर डेवलपमेंट (एसएफडी) और स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) के बीच हस्ताक्षरित इस समझौते के अनुसार, एसएफडी द्वारा एसबीपी में रखी गई 3 अरब डॉलर की जमा राशि की परिपक्वता अवधि बढ़ाई जाएगी। यह घोषणा उस समय हुई है जब एक दिन पहले ही एसएफडी ने गुरुवार को स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान में 3 अरब डॉलर की जमा राशि में से 2 अरब डॉलर जमा किए थे।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस महत्वपूर्ण वित्तीय समझौते पर वाशिंगटन डी.सी में विश्व बैंक-आईएमएफ स्प्रिंग बैठकों के मौके पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब और एसएफडी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के अलावा पाकिस्तान के संयुक्त राज्य अमेरिका में राजदूत भी मौजूद रहे।
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आर्थिक संकट के बीच बड़ी राहत
यह पहली बार नहीं है जब सऊदी अरब ने पाकिस्तान को वित्तीय सहायता प्रदान की है। इससे पहले मंगलवार को, सऊदी अरब ने अपनी 5 अरब डॉलर की सुविधा को और तीन वर्षों के लिए बढ़ाया था और पाकिस्तान के लिए अतिरिक्त 3 अरब डॉलर की जमा राशि का भी वादा किया था। इस नई सहायता के साथ, सऊदी अरब पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक में कुल 8 अरब डॉलर की नकद जमा राशि के साथ सबसे बड़ा देश बन गया है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान इस समय विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर दबाव में है, क्योंकि उसे अंतरराष्ट्रीय भुगतान और कर्ज चुकाने की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस समझौते को देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक अस्थायी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

क्या पूरी तरह राहत मिलेगी?
पाकिस्तान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) कार्यक्रम के तहत है, जहां उसे अपने विदेशी भंडार को स्थिर रखने के लिए कई शर्तों का पालन करना पड़ता है। इसी बीच सऊदी अरब का यह समर्थन पाकिस्तान के लिए बाहरी दबाव को कुछ समय के लिए कम कर सकता है। हालांकि यह कदम तुरंत राहत देता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लंबे समय तक संरचनात्मक सुधारों के बिना स्थिर नहीं हो सकती।
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