सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने एक प्रमुख क्रॉस-कंट्री तेल पाइपलाइन को बंद करने की घोषणा की है। यह कदम एक दिन पहले हुए हमले के बाद एहतियाती उपाय के तौर पर उठाया गया है। मंत्रालय ने हमलावरों की पहचान नहीं बताई है। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच छह महीने से अधिक समय से जारी जंग के कारण हालात संवेदनशील हैं। अब सऊदी से होने वाले निर्यात पर भी खतरा मंडराने लगा है।
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क्यों चिंताजनक है गैस पाइलपाइन का बंद होना?
जिस पाइपलाइन को बंद किया गया है, इसे करीब 40 साल पहले 1980 के दशक में ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की तरह शुरू किया गया था। इसने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के बाद भी सऊदी अरब को तेल निर्यात जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह बंद ऐसे समय में हुआ है, जब यमन में हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के पास तटीय क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है। इस कब्जे से प्रमुख शिपिंग लेन के माध्यम से सऊदी से होने वाले तेल निर्यात पर खतरा पैदा हो गया है।