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Sanctions on Russia: रूस पर प्रतिबंधों के नाकाम रहने से अमेरिका सरकार में अब है गहरी मायूसी

Mon, 19 Sep 2022 04:32 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

Sanctions on Russia: अधिकारियों के मुताबिक बाइडन प्रशासन यह अनुमान नहीं लगा पाया कि प्रतिबंधों के कारण तेल और गैस की कीमतें आसमान पर पहुंच जाएंगी। साथ ही उसे यह अनुमान भी नहीं था कि भारत और चीन जैसे देश रूस से तेल की अधिक खरीदारी करके उसके मददगार बन जाएंगे...
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Sanctions on Russia: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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जो बाइडन प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी इस बात से मायूस हैं कि पश्चिमी प्रतिबंधों का रूस पर वैसा असर नहीं हुआ, जैसा यहां सोचा गया था। रूसी अर्थव्यवस्था इन प्रतिबंधों को अब तक झेल गई है। लेकिन इन अधिकारियों का अनुमान है कि अगले साल तक इन प्रतिबंधों का बहुत खराब असर रूस को झेलना होगा।

अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत के आधार पर एक रिपोर्ट टीवी चैनल सीएनएन ने अपनी वेबसाइट पर छापी है। इसके मुताबिक सख्त प्रतिबंध लगाने का मकसद यह था कि उससे रूस की यूक्रेन में युद्ध जारी रखने की क्षमता खत्म हो जाए। साथ ही रूस में आम लोगों का जीवन बेहद मुश्किल हो जाए, जिससे जनमत राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ हो जाएगा। लेकिन अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमत में भारी बढ़ोतरी का फायदा रूस को मिला है। इससे कम तेल और गैस बेच कर भी उसने पहले से से ज्यादा रकम कमा ली है। फिनलैंड की संस्था सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के आंकड़ों के मुताबिक युद्ध के पहले 100 दिन में रूस ने यूरोप को तेल, गैस और कोयले के निर्यात से 93 बिलियन यूरो की अतिरिक्त कमाई की।

प्रतिबंधों का यह असर जरूर हुआ कि अप्रैल से जून के बीच रूस की अर्थव्यवस्था चार फीसदी सिकुड़ी। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के इस अनुमान से यह बहुत कम है। इन अधिकारियों ने इस अवधि में रूसी अर्थव्यवस्था में 15 फीसदी की सिकुड़न आने की भविष्यवाणी की थी। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने सीएनएन से कहा- ‘हम उम्मीद कर रहे थे कि अंतरराष्ट्रीय भुगतान के सिस्टम स्विफ्ट से रूस को बाहर करने औऱ उसके बैंकों को प्रतिबंधित करने से रूस की अर्थव्यवस्था गड्ढे में चल जाएगी। हमें अनुमान था कि सितंबर आते-आते रूस आज की तुलना में काफी कमजोर हो जाएगा।’ एक अन्य अधिकारी सीएनएन से कहा कि बाइडन प्रशासन को उम्मीद थी कि सितंबर आते-आते रूस अति पीड़ा झेलने की स्थिति में होगा।

हालांकि कुछ अधिकारी अब दावा कर रहे हैं कि प्रतिबंध लगाते वक्त यह अंदाजा था कि इन असर मध्य से दीर्घ अवधि में जाकर दिखेगा। सीआईए के निदेशक बिल बर्न्स ने पिछले हफ्ते एक साइबर कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था- रूसी अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक नुकसान होना तय है। रूस की कई पीढ़ियां इन प्रतिबंधों का असर झेलेंगी।

अधिकारियों के मुताबिक बाइडन प्रशासन यह अनुमान नहीं लगा पाया कि प्रतिबंधों के कारण तेल और गैस की कीमतें आसमान पर पहुंच जाएंगी। साथ ही उसे यह अनुमान भी नहीं था कि भारत और चीन जैसे देश रूस से तेल की अधिक खरीदारी करके उसके मददगार बन जाएंगे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय में काम कर चुके प्रतिबंध विशेषज्ञ जेसॉन ब्लेजेकिस ने सीएनएन से कहा- ‘हमने इन संभावनाओं को कम करके आंका। प्रतिबंधों से रूसी अर्थव्यवस्था में गिरावट निश्चित रूप से आई है, लेकिन यह उतनी नहीं है, जितनी यहां लोगों ने अनुमान लगाया था।’

अब कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों की नाकामी का दोष यूरोप पर मढ़ रहे हैं। एक अधिकारी ने कहा- ‘हम वर्षों से यह चेतावनी दे रहे थे कि यूरोप को रूसी ऊर्जा पर अपनी निर्भरता खत्म करनी चाहिए। लेकिन वे तैयार तब हुए, जब काफी देर हो चुकी थी।’

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