पिछले साल दिवंगत भाजपा नेता व तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी अपने संबोधन के बाद सार्क मंत्रिस्तरीय परिषद की बैठक छोड़कर चली गई थीं। उन्होंने यह कदम जम्मू-कश्मीर में तीन पुलिसकर्मियों की नृशंस हत्या और इस्लामाबाद की तरफ से कश्मीरी आतंकियों के ऊपर डाकटिकट जारी करने के विरोध में उठाया था।
इससे पहले 2016 में जम्मू-कश्मीर में उड़ी में आतंकी हमले के विरोध में इस्लामाबाद में आयोजित हो रहे सार्क सम्मेलन का भारत के साथ बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने भी बहिष्कार कर दिया था। इस पर पाकिस्तान को यह सम्मेलन रद्द करना पड़ा था।
विदेश मंत्री जयशंकर ने बैठक में कहा कि आतंकवाद को बहुत बड़ी समस्या बताते हुए कहा, हमारा मानना है कि फलदायी सहयोग के लिए और हमारे क्षेत्र की बेहतरी और उन्नति के लिए आतंकवाद के हर रूप को खत्म करना एक पूर्व शर्त है।
उन्होंने कहा, दक्षिण एशियाई सैटेलाइट का उदाहरण यह बताता है कि किस तरह से भारत ने यह पहल की है कि उसके पड़ोसी समृद्ध हों। दक्षिण एशियाई सैटेलाइट को साल 2017 में इस उद्देश्य के साथ लॉन्च किया गया था कि सार्क क्षेत्र में गरीबी की स्थिति को समझने के लिए वैज्ञानिक समाधान मिल सकें।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रवाद विश्व के हर कोने में फैल चुका है। अगर हम पीछे रह गए हैं, तो इसलिए क्योंकि दक्षिण एशिया में वैसा सामान्य व्यापार और संपर्क नहीं है जैसा अन्य क्षेत्रों में है।