विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बार फिर आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर हमला बोला है। एशिया सोसायटी द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन समारोह को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद पर उनकी सरकार द्वारा सार्वजनिक रूप से स्वीकार की गई ऐसी नीति बनी हुई है जिसे वह जायज ठहरा रहे हैं। इसलिए उनके साथ रिश्ते सामान्य करना बहुत मुश्किल हो गया है।
जयशंकर ने कहा कि केवल आतंकवाद ही एक मुद्दा नहीं है, बल्कि पाकिस्तान भारत के साथ सामान्य कारोबार नहीं करता और उसने हमें मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्जा नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि हमारे वीजा संबंध भी सामान्य नहीं हैं और वे इस मामले में बहुत प्रतिबंधात्मक हैं। उन्होंने भारत और अफगानिस्तान के बीच बन रहे अच्छे संबंधो को बाधित करने की कोशिश की है।
विदेश मंत्री ने और पड़ोसी देशों का हवाला देते हुए कहा कि सामान्य पड़ोसी वीजा और कारोबारी संबंध मधुर रखते हैं, वे आपको कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात कि वे आतंकवाद को बढ़ावा नहीं देते।
उन्होंने आगे कहा कि मेरा मानना है जब तक इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाएगा तो इस विचित्र पड़ोसी के साथ सामान्य संबंध कैसे रखे जाएं, यह हमारी विदेश नीति के लिए बहुत बड़ी समस्या वाला विषय है।
पिछले साल विभाजन के बाद से कश्मीर के घटनाक्रम के सवाल पर जयशंकर ने कहा कि पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य अब दो केंद्रशासित प्रदेशों में बंट गया है। उन्होंने कहा कि भारत की बाहरी सीमाएं नहीं बदली हैं। जहां तक हमारे पड़ोसी देशों की बात है, तो उनके लिए हमारा कहना है कि यह हमारे लिए आंतरिक विषय है। हर देश अपने प्रशासनिक न्यायक्षेत्र को बदलने के अधिकार रखता है। चीन जैसे देश ने भी अपने प्रांतों की सीमाएं बदली हैं और मुझे विश्वास है कि अन्य कई देश ऐसा करते हैं।
उन्होंने कहा कि पड़ोसी तभी प्रभावित होते हैं जब आपकी बाहरी सीमाएं बदलती हैं लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं है। वर्ष 2016 में पाकिस्तान के आतंकी समूहों द्वारा पठानकोट वायु सेना केंद्र पर आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में तनाव आ गया था। इसके बाद उरी में भारतीय सेना के शिविर पर हमले समेत अन्य हमलों ने संबंधों को और बिगाड़ दिया।