विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारतीय राजनीति और भारतीय क्रिकेट टीम इस बात का सबसे समावेशी उदाहरण व साक्ष्य हैं कि लोकतंत्र मजबूत हुआ है और यह वास्तव में कारगर है। वह ‘इंडो-अमेरिकन आर्ट्स काउंसिल’ (एआईआईसी) के उपाध्यक्ष राकेश कौल से बात कर रहे थे।
इस चर्चा के दौरान जयशंकर ने कहा, भारतीय संसद, मंत्रिमंडल, राजनीति में काम कर रहे लोगों और क्रिकेट टीम को देखिए तथा अपने आप से पूछिए कि ये लोग 10, 20 या 30 साल पहले क्या थे? उनकी उससे तुलना कीजिए। हमारा राजनीतिक वर्ग कितना संकुचित था। यदि आप मुझसे पूछें, तो मेरी नजर में लोकतंत्र के वास्तव में गहरे होने और इसके कारगर होने के दो सबसे बड़े समावेशी उदाहरणों में एक उदाहरण भारतीय राजनीति है और दूसरा भारतीय क्रिकेट टीम है।
जयशंकर यहां एआईआईसी द्वारा आयोजित ‘मोदी एट द रेट 20 : ड्रीम्स मीट डिलिवरी’ किताब पर चर्चा के दौरान भारतीय लोकतंत्र में प्रतिबिंबित समावेशिता पर बोल रहे थे। हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की प्रमाणिकता देखिए। यहां चुनावों का सम्मान होता है। कोई इस प्रक्रिया को चुनौती नहीं देता।
भारतीय क्रिकेट टीम व सियासत में यह समानता
जयशंकर ने कहा, वैसे मैं, किसी की क्षमता को नहीं आंक रहा। मैं उन्हें लेकर किसी संशय में नहीं हूं। मैं एक बुनियादी अवलोकन कर रहा हूं कि यदि आज राजनीति में मौजूद लोगों का मूल देखें, यदि आप भारत की संसद को देखें, आप देखिए कि वे किस शहर से आए हैं, उन्होंने कहां पढ़ाई की, उनकी पृष्ठभूमि या भाषा क्या है, तो ये बहुत, बहुत अलग हैं। यही बात भारतीय क्रिकेट टीम पर भी लागू होती है। दोनों में यही समानता है।
मोदी खुद बदलाव का परिणाम
यह पूछे जाने पर क्या यह बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाए हैं, जयशंकर ने कहा, मैं दरअसल यह कहूंगा कि मोदी खुद इस बदलाव का परिणाम हैं। उनके जैसे किसी व्यक्ति का अंतत: भारत का प्रधानमंत्री बन पाना स्वयं दर्शाता है कि देश में कितना बदलाव आ चुका है। उन्होंने कहा, भारत में मतदाताओं और महिला मतदाताओं की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है।