विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यहां भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल से मुलाकात करने से स्पष्ट इंकार कर दिया। जयपाल ही वह सांसद हैं, जिन्होंने अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में लगे प्रतिबंधों के खिलाफ अमेरिकी संसद में प्रस्ताव पेश किया था। हुए हैं।
भारत-यूएस टू प्लस टू वार्ता में भाग लेने के बाद जयशंकर ने पत्रकारों से कहा कि यहां की संसद की प्रतिनिधि सभा में इस महीने रखा गया प्रस्ताव जम्मू कश्मीर की वास्तविक हकीकत को बयान नहीं करता है। विदेश मंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा, मैं इस प्रस्ताव से वाकिफ हूं और मेरा मानना है कि यह जम्मू कश्मीर पर सही समझ को व्यक्त नहीं करता या भारत सरकार जो कर रही है, उसे लेकर निष्पक्ष बात नहीं कहता। उन्होंने कहा, मुझे जयपाल से मिलने में कोई रुचि नहीं है। मैं केवल उन लोगों से मिलने के ख्वाहिशमंद हूं, जिन्होंने पहले से कोई राय नहीं बना रखी है और तटस्थ हैं।
यूएस चाहता है आतंक पर लगाम कसे पाक
जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान को लेकर ट्रंप प्रशासन का रुख बिलकुल स्पष्ट है कि इस्लामाबाद आतंकवादी समूहों पर लगाम लगाने के लिए तत्काल, निरंतर एवं अपरिवर्तनीय कार्रवाई करे और यह सुनिश्चित करे कि आतंकवाद के लिए उसकी धरती का इस्तेमाल नहीं हो। उन्होंने कहा भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में संभावनाओं का विस्तार हुआ है। उन्होंने बताया कि वार्ता में पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान और दक्षिण पूर्वी एशिया समेत क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान के मुताबिक, दोनों देशों ने पाकिस्तान से अल कायदा, आईएसआईएस, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हक्कानी नेटवर्क, हिज्ब-उल-मुजाहिदीन, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी समेत सभी आतंकवादी नेटवर्कों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने को कहा।
नागरिकता कानून पर भी हुई चर्चा
जयशंकर ने कहा कि अमेरिकी सांसदों ने उनकी नागरिकता कानून को लेकर भी चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि, मैंने उन्हें उससे ज्यादा अधिक साफ तस्वीर बताई है, जो कि उन्होंने पढ़ी हुई है। इससे पहले अमेरिका के एक शीर्ष अधिकारी ने भारत में नागरिकता कानून को लेकर हो रहे विरोध पर कहा है कि हम सक्रिय राजनीतिक बहस देख रहे हैं, संसद में हो रही चर्चा पर को भी देख रहे हैं, लोगों का विरोध प्रदर्शन पर भी हमारी नजर है, हम जानते हैं कि एनआरसी को लेकर न्यायिक प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा अमेरिका ने यह भी कहा कि हम भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं और मूल्यों का सम्मान करते हैं। एक बड़े लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत को अल्पसंख्यक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, मानवाधिकार के आसपास के मुद्दे के रूप में महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
एच-1बी वीजा पर कहा, प्रतिभा को रोकना नहीं चाहिए
जयशंकर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि अमेरिका को भारतीय प्रतिभाओं के यहां आने से रोकना नहीं चाहिए। इसकी वजह यह है कि यह आर्थिक सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह दो देशों के बीच पुल बनाने का काम करते हैं।
बहरीन में अमेरिकी नौसैना में भारतीय अधिकारी होंगे तैनात
विदेश मंत्री ने कहा कि वार्ता के दौरान अंतरिक्ष पर शोध संबंधी जानकारी, तकनीकी सहयोग और जल संसाधन प्रबंधन विषयों पर महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने आपदा अनुकूल ढांचे संबंधी गठबंधन और हिंद-प्रशांत सागर पहल समेत भारत की कई पहलों का समर्थन किया है। हालांकि वार्ता मुख्य रूप से विदेश नीति, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों पर केंद्रित थी। उन्होंने कहा कि इस वार्ता में एक प्रमुख फैसला लिया गया है जिसके तहत बहरीन स्थित अमेरिकी नौसैन्य केंद्रीय कमान में भारतीय अधिकारियों को तैनात जाएगा और संभव होगा तो विशेष अभियान कमान में भी भारतीय अधिकारियों को रखा जाएगा। दूसरी ओर, हिंद महासागर क्षेत्र में इंफार्मेशन फ्यूजन सेंटर में अमेरिकी अधिकारी को तैनात किया जाएगा।
डेमोक्रेेटस से कोई समस्या नहीं
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि भारत सरकार को अमेरिका के विपक्षी दल डेमोक्रेट्स से कोई समस्या नहीं है और उनके साथ बहुत सशक्त संबंध हैं। मेरी अपनी समझ है कि कुछ एक आवाजों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और न ही जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इसे व्यक्तिगत होने के तौर पर नहीं देखते और वह किसी का नाम लेने में इच्छुक नहीं हैं। हम उससे बात करते रहे हैं जो तार्किक है और दिमाग को खुला रखा है।