बेलारुस के राष्ट्रपति अलेक्सांद्र लुकाशेंकों की मध्यस्थता से रूस में प्राइवेट आर्मी वैगनर ग्रुप की बगावत पर जरूर तुरंत लगाम लग गई, लेकिन इस घटना ने रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन के सत्ता-तंत्र की हिल चुकी जड़ों को बेनकाब कर दिया है। बगावत जल्द ही खत्म हो गई, लेकिन उसने यह साफ कर दिया कि रूसी राष्ट्रपति की जमीन बहुत कमजोर पड़ चुकी है।
बगावत के कुछ घंटों के ही अंदर पुतिन ने राष्ट्र को संबोधित किया था। इसमें उन्होंने वैगनर ग्रुप के सरदार येवगेनी प्रिगोझिन के कदम को देशद्रोह बताया और बगावत में शामिल सभी लोगों को कड़ी सजा देने का इरादा जताया। लेकिन जल्द ही वे प्रिगोझिन को बेलारुस जाकर बसने की इजाजत देने और वैगनर ग्रुप के बाकी लड़ाकुओं को माफ करने पर राजी हो गए। पर्यवेक्षकों के मुतबिक साफ तौर पर पुतिन को अहसास हो गया था कि बगावत को कुचलना आसान नहीं होगा। इसलिए उन्होंने समझौता कर लेना उचित समझा।
विश्लेषकों के मुताबिक अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि क्या प्रिगोझिन बेलारुस में रहते हुए वैगनर ग्रुप के अपने पूर्व सहयोगियों को भी वहां बुला सकेंगे। अगर ऐसे लोग वहां आए, तो उनकी क्या हैसियत होगी, यह भी स्पष्ट नहीं है। बगावत के समय प्रिगोझिन ने अपने टेलीग्राम चैनल पर कई वीडियो जारी किए। लेकिन बगावत खत्म करने के लिए हुए समझौते के बाद से वे चुप्पी साधे हुए हैं।
पुतिन प्रशासन को संभवतः इस बात का अहसास है कि बागी सेना कमांडर को बिना सजा दिए विदेश जाने की इजाजत देने के राष्ट्रपति के फैसले को देश में उनकी कमजोरी की निशानी माना गया है। इसलिए प्रशासन की तरफ से सफाई पेश की गई है। क्रेमलिन (राष्ट्रपति कार्यालय) के प्रवक्ता ने कहा कि पुतिन का “सर्वोच्च उद्देश्य” खूनखराबे और आंतरिक लड़ाई को टालना था। प्रवक्ता ने कहा कि ऐसी लड़ाई का क्या नतीजा होता, उसका अनुमान लगाना कठिन था।
यूक्रेन में अमेरिका राजदूत रह चुके जॉन हर्बस्ट ने अमेरिकी टीवी चैनल से बातचीत में कहा- ‘इस घटना ने हमेशा के लिए पुतिन की आभा को खत्म कर दिया है।’ विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि बगावत का एलान करने के बाद वैगनर ग्रुप के दस्ते आगे बढ़ते हुए राजधानी मॉस्को काफी करीब तक पहुंच गए थे। जिस समय समझौता हुआ, ये दस्ते मास्को से सिर्फ 200 किलोमीटर दूरी पर थे।
अमेरिकी थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर स्टडी ऑफ वॉर ने कहा है- ‘इस बगावत ने क्रेमलिन और रूसी रक्षा मंत्रालय में मौजूद गंभीर कमजोरियों को उजागर कर दिया है। अगर प्रिगोझिन चाहते तो वैगनर के दस्ते मॉस्को के बाहरी इलाकों तक पहुंच जाते।’
प्रिगोझिन ने रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू को हटाने की मांग की थी। कुछ खबरों में कहा गया है कि पुतिन के इस मांग को मानने के बाद प्रिगोझिन ने अपनी बगावत खत्म की। पर्यवेक्षकों के मुताबिक अगर आने वाले कुछ दिनों में शोइगू को रक्षा मंत्रालय से हटाया गया, तो उससे पुतिन का सियासी रुतबा और धूमिल हो जाएगा।