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'मजबूरी' में दोस्ती: सऊदी अरब और वेनेजुएला के आगे हाथ फैला कर विवाद से घिरे जो बाइडन

Wed, 09 Mar 2022 02:15 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

राष्ट्रपति जो बाइडन सऊदी अरब जाने की योजना बना रहे हैं। वहां वे दुनिया भर में कच्चे तेल की सामान्य सप्लाई बनाए रखने के उपायों पर चर्चा करेंगे। लेकिन व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने सोमवार को इस खबर की पुष्टि करने से इनकार कर दिया...
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सऊदी अरब के प्रिंस सलमान बिन अब्दुल-अज़ीज़ के साथ जो बाइडन - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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यूक्रेन संकट के बीच वेनेजुएला और सऊदी अरब की तरफ ‘दोस्ती का हाथ’ बढ़ाने की राष्ट्रपति जो बाइडन की पहल विवाद से घिर गई है। रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण पश्चिमी देशों में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर है। बताया जाता है कि उससे राहत पाने की कोशिश में बाइडन प्रशासन ने इन दोनों देशों की तरफ हाथ बढ़ाया है।

ब्योरा देने से इंकार

बीते शनिवार को अमेरिकी अधिकारियों का एक दल वेनेजुएला गया, जहां उसकी राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से सीधी बातचीत हुई। ये यात्रा इसके बावजूद हुई कि अमेरिका मादुरो प्रशासन को वेनेजुएला की वैध सरकार नहीं मानता। इसके विपरीत उसने वहां के विपक्ष के नेता हुआन जेरार्दो गुआइदो को मान्यता दे रखी है। अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत के बाद मादुरो ने अपनी पार्टी की बैठक में कहा कि मुलाकात सद्भाव के माहौल में हुई और बातचीत आगे भी जारी रहेगी। लेकिन उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने भी मुलाकात की पुष्टि की, लेकिन उस बारे में विस्तार से कुछ बताने से इनकार किया।

बाइडन जाएंगे सउदी अरब!

इस बीच अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस.कॉम ने बताया है कि राष्ट्रपति जो बाइडन सऊदी अरब जाने की योजना बना रहे हैं। वहां वे दुनिया भर में कच्चे तेल की सामान्य सप्लाई बनाए रखने के उपायों पर चर्चा करेंगे। लेकिन व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने सोमवार को इस खबर की पुष्टि करने से इनकार कर दिया। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि अमेरिकी अधिकारियों ने पिछले महीने सऊदी अरब की यात्रा की थी, जहां उनकी ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी बात हुई थी।

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सऊदी अरब और वेनेजुएला तेल के बड़े उत्पादक देशों में हैं। इन दोनों के प्रति बाइडन प्रशासन के रुख में गरमाहट का संकेत उस समय मिला है, जब अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने रूस से तेल आयात रोकने की बात कही है। अभी तक पश्चिमी देशों ने रूस पर जो प्रतिबंध लगाए हैं, उनसे रूसी कच्चे तेल और गैस के आयात को बाहर रखा गया है। बताया जाता है कि रूस से तेल और गैस की खरीदारी रोकने के पहले ये देश वैकल्पिक उपाय कर लेना चाहते हैं।

तेल उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे अमेरिका

लेकिन बाइडन प्रशासन की इस पहल की खुद राष्ट्रपति की डेमोक्रेटिक पार्टी में आलोचना हो रही है। पार्टी की सांसद इल्हान उमर ने एक ट्विट में कहा कि बाइडन ने यमन में सऊदी अरब के युद्ध अपराधों को लेकर आंख मूंद रखी है। उन्होंने कहा- ‘पुतिन के अनैतिक युद्ध के कारण सऊदी अरब से हमारा रिश्ता प्रगाढ़ नहीं होना चाहिए, जिसने यमन में दुनिया की सबसे बुरी मानवीय त्रासदी पैदा कर रखी है।’ हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के अगले चुनाव के लिए न्यूयॉर्क से डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार और प्रोग्रेसिव नेता मेलानी डी’आरियो ने कहा है कि इस मौके का लाभ उठा कर अमेरिका को पेट्रोलियम पर अपनी निर्भरता घटानी चाहिए, ताकि पर्यावरण की रक्षा की जा सके।

इस विपरीत रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं ने कहा है कि अमेरिका को सऊदी अरब या वेनेजुएला के आगे झुकने के बजाय अपने देश में तेल का उत्पादन बढ़ाना चाहिए। सांसदों मार्को रुबियो और कार्लोस गिमेनेज ने उन दोनों देशों की तरफ हाथ बढ़ाने की आलोचना की है। जो बाइडेन ने 2020 में राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान कहा था कि अगर वे राष्ट्रपति बने, तो पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या की कीमत सऊदी अरब को चुकानी होगी।

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