राष्ट्रपति पुतिन ने तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे को लेकर अमेरिका पर तीखा कटाक्ष किया, साथ ही उन्होंने अफगानिस्तान में अमेरिका और नाटो की मौजूदगी को विफल नीति बताया।
रूस और यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के बीच राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को कजाकिस्तान के अस्ताना में चल रहे सीआईसीए शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान एशिया में सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौतियों में से एक है और उन्होंने देश में स्थिति को सामान्य रखने के लिए शंघाई सहयोग संगठन और क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी निकाय के संसाधनों का उपयोग करने पर जोर दिया। वहीं पुतिन इससे पहले भी अफगानिस्तान को लेकर खतरे की बात कह चुके हैं।
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अमेरिका पर किया तीखा कटाक्ष
आधिकारिक बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति पुतिन ने तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे को लेकर अमेरिका पर तीखा कटाक्ष किया, साथ ही उन्होंने अफगानिस्तान में अमेरिका और नाटो की मौजूदगी को विफल नीति बताया। बयान के मुताबिक अफगानिस्तान अमेरिका और नाटो की मौजूदगी के 20 साल बाद भी आतंकवादी खतरे से निपटने में असमर्थ रहा अब यहां विस्फोट हो रहे हैं। साथ ही बताया कि हाल ही में काबुल में रूसी दूतावास के बाहर 5 सितंबर को विस्फोट हुआ था।
पुतिन ने कहा कि रूस सीआईसीए व्यापार परिषद का एक संस्थापक देश रहा है और उन्होंने रूसी देशों को आर्थिक विकास का वाहक बताया। रूसी राष्ट्रपति ने एशिया के विकास और समृद्धि के लिए एक खुला व्यापार और निवेश सहयोग स्थान बनाने और विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग संबंधों को व्यापक और गहरा करने की बात कही।
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सीआईसीए एशिया में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में सहयोग बढ़ाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच है। इस मंच पर एशिया और विश्व में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को लेकर विचार-विमर्श किया जाता है। इसमें करीब 27 सदस्य देश शामिल होते हैं।
भारत की ओर से मीनाक्षी लेखी ले रही भाग
वहीं भारत की ओर से, मीनाक्षी लेखी कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित सीआईसीए एशिया के छठे शिखर बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही हैं। भारत सीआईसीए के संस्थापक सदस्यों में से एक है। भारत ने सीआईसीए की पहल का समर्थन किया है, जिसमें विभिन्न सीआईसीए गतिविधियों का आयोजन और भाग लेना शामिल है।