Russian pipeline leaks: नॉर्ड स्ट्रीम गैस पाइल लाइन
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रूस से यूरोप तक जाने वाली गैस पाइपलाइनें- नॉर्ड स्ट्रीम-1 और नॉर्ड स्ट्रीम-2 में कथित तोड़फोड़ के लिए रूस और अमेरिका दोनों पर समान रूप से शक जताया गया है। रूस ने इस मामले में संयुक्त राष्ट्र राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई है। उसने कहा है कि बैठक में यह साफ हो जाएगा कि इसकी जिम्मेदारी किस पर है। उधर पश्चिमी देशों में शक जताया गया है कि यूरोप का ऊर्जा संकट बढ़ाने के मकसद से रूस ने यह काम किया हो सकता है।
वेबसाइट एशिया टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि ये घटना ठीक उस समय हुई, जब नॉर्वे और पोलैंड ने ट्रांस बाल्टिक पाइपलाइन की शुरुआत की घोषणा की। इससे पूर्वी यूरोप के देशों की रूसी ऊर्जा पर निर्भरता घट गई। विशेषज्ञों ने कहा है कि जिस तरह अलग-अलग जगहों पर एक तरह से लीक हुई है, उससे यह बिल्कुल नहीं लगता कि यह एक सामान्य हादसा है। नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइनें समुद्र में 80 से 110 मीटर की गहराई में बनाई गई हैं, जहां तक जाना आम तौर पर आसान नहीं होता। फिर विशेषज्ञों ने कहा है कि नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइनें डीएनवी ग्रेड के एसएडब्लूएल-485 से बनाई गई हैं, जिनकी दीवारें 26.8 से 34.4 मिलीमीटर मोटी हैं। पाइपों के ऊपर कंक्रीट का कवर है। इसलिए इनमें छेद करना आसान काम नहीं है।
इसलिए अधिक संभावना इस बात की है कि रूस-यूक्रेन युद्ध से बने हालात को प्रभावित करने के लिए जानबूझ कर तोड़फोड़ की गई है। इसीलिए चर्चा में ये सवाल आया है कि तोड़फोड़ किसने की? यूक्रेन के राष्ट्रपति के सलाहकार मिखायलो पोडोलयाक ने बुधवार को कहा- यह एक आतंकवादी कार्रवाई और यूरोपियन यूनियन के खिलाफ आक्रमण है, जिसकी योजना रूस ने बनाई।
रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय ने इस आरोप को ‘परले दर्ज की मूर्खता’ की मिसाल बताया है। कई विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि दोनों पाइपलाइनों में रूस की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी गैजप्रोम की 51 फीसदी की शेयर होल्डिंग है। नॉर्ड स्ट्रीम-2 के निर्माण पर 11 बिलियन डॉलर का खर्च आया। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि रूस खुद अपना नुकसान क्यों करेगा? गैस सप्लाई तुरंत रोकने लिए वह ये कदम खुलेआम उठा सकता था।
रूसी विशेषज्ञों ने संदेह जताया है कि रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करने और यूरोप पर उसका प्रभाव खत्म करने के मकसद से यूक्रेन ने तोड़फोड़ की गई हो सकती है। कुछ विश्लेषणों में फिनलैंड पर शक जताया गया है, जिसके हाल में रूस से संबंध बहुत बिगड़ गए हैं। रूस ने फिनलैंड को बिजली की सप्लाई रोक दी थी, जबकि फिनलैंड ने रूस से कोयले और कच्चे तेल के आयात पर खुद रोक लगा दी थी।
लेकिन सबसे सनसनीखेज चर्चा यह है कि ये काम अमेरिका ने किया। ऐसा संकेत देने वालों में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी हैं। उधर अमेरिकी टीवी चैनल फॉक्स न्यूज ने भी यह शक जताया है। उसके मशहूर एंकर टकर कार्लसन ने जिक्र किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रपति जो बाइडन ने फरवरी में सार्वजनिक रूप से कहा था कि अगर रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तो अमेरिका नॉर्ड स्ट्रीम-2 को सक्रिय नहीं रहने देगा। जानकारों के मुताबिक इस बारे में कोई ठोस निष्कर्ष निकालना मुश्किल है। लेकिन इससे यूरोप के ऊर्जा संकट ने बेहद गंभीर रूप ले लिया है, यह बात सबके सामने है।