रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
- फोटो : Agency (File Photo)
रूसी सरकार का दावा है कि वहां आम लोगों की खुशहाली में तेज बढ़ोतरी हुई है। 2021 में लोगों की आमदनी में जितनी वृद्धि हुई, उतना उसके पहले आठ वर्षों में नहीं हुआ था। इन सरकारी आंकड़ों ने लोगों को चौंका दिया है। 2021 भी कोरोना महामारी का साल था, जिसकी बहुत बुरी मार रूस पर भी पड़ी थी। वहां कोरोना संक्रमण के कारण मौतों की संख्या खासी ऊंची रही। साथ ही अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई थी।
लोगों की आय में 3.1 फीसदी की वृद्धि!
रूस की संघीय सांख्यिकी सेवा एजेंसी रोसस्टैट ने इस हफ्ते आर्थिक आंकड़े जारी किए। इससे जो तस्वीर उभरी है, वह इसके पहले सरकार की तरफ से लगाए गए अनुमानों से भी बेहतर है। रूस सरकार ने अनुमान लगाया था कि 2020 में लोगों की आय में 2.5 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। जबकि ताजा आंकड़ों के मुताबिक ये वृद्धि 3.1 फीसदी रही। इसमें सबसे ज्यादा बढ़ोतरी साल की चौथी तिमाही में हुई। इसके पहले 2013 में रूस में औसत आमदनी में चार फीसदी का इजाफा हुआ था।
विश्लेषकों का कहना है कि अब दिखी खुशहाली के पीछे कारण संभवतया आंकड़ों का खेल है। सरकार ने 2014 में आमदनी को मापने की कसौटी बदल दी थी। इसलिए 2013 में जो वृद्धि दिखी थी, उसकी तुलना में अब हुई वृद्धि को देखना उचित नहीं होगा। विश्लेषकों के मुताबिक रोसस्टैट ने अब बताया है कि 2020 में आमदनी में दो फीसदी की गिरावट आई। जबकि उसने पहले उस वर्ष औसत आमदनी 2.8 फीसदी गिरने की बात कही थी। बहरहाल, अगर रोसस्टैट के ताजा आंकड़े को भी मान लिया जाए, तो 2021 में 2019 की तुलना में औसत आय में सिर्फ 1.1 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
लेकिन पुतिन सरकार ताजा आंकड़ों को लेकर उत्सव मनाने के मूड में है। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय से जुड़े एकेडेमी ऑफ नेशनल इकोनॉमी एंड पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में रिसर्चर अलेक्सी वेदेव ने रूस के बिजनेस अखबार- आरबीके से कहा कि आमदनी में 3.1 फीसदी की बढ़ोतरी बहुत अच्छी खबर है। खास कर यह देखते हुए कि 2021 में महंगाई दर 8.4 फीसदी रही थी। उन्होंने कहा कि महामारी के बाद बाजार खुलने पर लोगों ने अधिक खर्च किए, जिससे महंगाई बढ़ी। लेकिन वे इसीलिए खर्च कर पाए, क्योंकि उनकी आमदनी बढ़ी।
रूस में महंगी हुईं खानपान की चीजें
पर्यवेक्षकों के मुताबिक सरकारी आंकड़ों में तस्वीर जितनी गुलाबी दिखी है, रूस की असली हालत उससे मेल नहीं खाती। पिछले साल खान-पान की चीजों के भाव तेजी से चढ़े। तब निम्न आय वाले लोगों को रोजमर्रा की जरूरत वाली चीजों के लिए संघर्ष करते देखा गया। इस वजह से नवंबर में सरकार को देश में उत्पादित वस्तुओं के निर्यात को सीमित करने का फैसला लेना पड़ा।
विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक आय की गणना करते समय टैक्स, ब्याज, और मुद्रास्फीति में हुई बढ़ोतरी के आंकड़ों को कुल आय से घटाना पड़ता है। सरकारी एजेंसी ने अभी कुल आय का आंकड़ा दिया है, जो लोगों की असली माली हालत का संकेत नहीं है। इसी हफ्ते रिसर्च सेंटर ए-2 ने एक रिपोर्ट जारी की थी। उसके मुताबिक रूस के 62 फीसदी लोगों के बैंक खातों में सिर्फ तीन महीने तक खर्च चला सकने के लायक धन ही है। इसे किसी रूप में खुशहाली नहीं कहा जा सकता।