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55 महीने में पहली बैठक: यूएस में जर्मनी-रूस के विदेश मंत्रियों की मुलाकात, 20 मिनट में ईयू से नाटो तक बातचीत

Sun, 27 Sep 2026 01:00 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

यूएन महासभा के दौरान रूस और जर्मनी के विदेश मंत्रियों ने मुलाकात की। यह मुलाकात 2022 के बाद पहली बार हो रही है। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बैठक चली। 
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रूस और जर्मनी के झंडे - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर शनिवार को जर्मनी और रूस के विदेश मंत्रियों की आमने-सामने मुलाकात हुई। रूस के यूक्रेन पर 2022 में पूर्ण पैमाने पर हमला शुरू करने के बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच यह पहली ऐसी सीधी मुलाकात मानी जा रही है। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब यूरोपीय संघ और रूस के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और इसके कुछ ही देर बाद रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया।

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'टकराव बढ़ाने वाला रास्ता छोड़िए'
बैठक में जर्मन विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने रूस से जर्मनी, यूरोप और NATO के साथ तनाव बढ़ाने वाली अपनी 'खतरनाक राह' छोड़ने की अपील की। जर्मन प्रतिनिधिमंडल के एक अधिकारी के मुताबिक, वाडेफुल ने कहा कि जर्मनी रूस के साथ रिश्ते बेहतर करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए रूस के नेतृत्व को यूक्रेन में युद्ध खत्म करने की वास्तविक इच्छा दिखानी होगी। हाल के हफ्तों में रूस और जर्मनी के रिश्तों में तनाव और बढ़ा है। पिछले महीने लीपजिग एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले की कोशिश हुई थी। जर्मनी ने इसके लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ जवाबी कदम भी उठाए गए। जर्मन समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक, दोनों विदेश मंत्रियों की करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई। बैठक के लिए जगह रूसी पक्ष की ओर से उपलब्ध कराई गई थी। बातचीत खत्म होने पर दोनों मंत्रियों ने एक-दूसरे से हाथ भी मिलाया।

बातचीत के बाद लावरोव का पश्चिम पर तीखा हमला
वाडेफुल से मुलाकात के बाद रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर पहुंचे। अपने भाषण में उन्होंने यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस का पक्ष रखा और पश्चिमी देशों पर जमकर निशाना साधा। जर्मनी भी उनके निशाने पर रहा। लावरोव ने खास तौर पर जर्मनी और जापान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता देने की चर्चा का विरोध किया। अमेरिका लंबे समय से जर्मनी, जापान और भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट दिए जाने का समर्थन करता रहा है।
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'पश्चिम अपने विशेषाधिकार बचाने में लगा है'
NATO और अमेरिका की आलोचना करते हुए लावरोव ने कहा कि पश्चिम अब भी “अपने विशेषाधिकार बनाए रखने और अपने नियम दूसरों पर थोपने” की कोशिश कर रहा है, जबकि दुनिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हमारी आंखों के सामने एक अधिक न्यायपूर्ण, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था उभर रही है।'  रूस ब्रिक्स समेत कई ऐसे अंतरराष्ट्रीय समूहों का हिस्सा है, जिन्हें लावरोव पश्चिमी व्यवस्था के विकल्प के तौर पर पेश करते रहे हैं। मॉस्को भी लगातार यह संदेश देने की कोशिश करता रहा है कि यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों के साथ टकराव के बावजूद वैश्विक मंच पर रूस की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने किया बड़ा दावा
रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने अपने निजी टेलीग्राम चैनल पर दावा किया कि “दर्जनों राजनयिक” लावरोव से मिलने पहुंचे और उन्होंने रूस का हाथ मिलाकर आभार जताया। इस बीच यूक्रेन युद्ध में हवाई हमले भी तेज हो गए हैं। पिछले साल से जमीनी मोर्चे पर बड़े बदलाव नहीं हुए हैं, लेकिन हाल के महीनों में रूस ने यूक्रेन पर क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों, भारी ग्लाइड बमों और जेट इंजन वाले ड्रोन से हमले बढ़ाए हैं। दूसरी ओर, यूक्रेन भी लंबी दूरी के ड्रोन के जरिए रूस की तेल रिफाइनरियों और कारोबारिक ठिकानों को निशाना बना रहा है।

दोनों देशों ने शनिवार के हमलों में मौतों की जानकारी दी
यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार को रूस के हमलों में चार लोगों की मौत हुई। वहीं रूसी अधिकारियों ने कहा कि यूक्रेन के ड्रोन हमले में तीन लोग मारे गए। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। मॉस्को इसे अब भी “विशेष सैन्य अभियान” कहता है और उसका कहना है कि इसका मकसद रूस की सुरक्षा तथा रूसी भाषी लोगों के अधिकारों की रक्षा करना है। पश्चिमी विश्लेषकों के अनुमानों के मुताबिक, युद्ध में अब तक 5 लाख से ज्यादा रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं। यूक्रेन की सैन्य क्षति भी 5 लाख से ज्यादा बताई गई है, जिसमें 1.40 लाख तक मौतें शामिल होने का अनुमान है। हालांकि, रूस और यूक्रेन दोनों ही अपने सैन्य नुकसान के आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक नहीं करते हैं।

यूक्रेन युद्ध का असर सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं
इस युद्ध का असर ईंधन, खाद और अनाज की वैश्विक आपूर्ति पर भी पड़ा है। इसके साथ ही रूस और पश्चिमी देशों के बीच भू-राजनीतिक दूरी भी बढ़ी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए अपने भाषण में दूसरे देशों से रूस की कमाई के स्रोतों पर दबाव बनाए रखने और उसकी युद्ध क्षमता को कमजोर करने की अपील की थी। शनिवार सुबह सोशल मीडिया पर भी उन्होंने यही संदेश दोहराया। जेलेंस्की ने कहा, 'हमारे साझेदारों के लिए यह नहीं भूलना जरूरी है कि रूस हर दिन तनाव बढ़ा रहा है।' उन्होंने आगे कहा कि युद्ध को और फैलने से रोकने के लिए दुनिया को ज्यादा मजबूत कदम उठाने होंगे।

अमेरिका ने रूस पर नए प्रतिबंधों वाला कानून तो बनाया, लेकिन अमल बाकी
अमेरिकी सांसदों ने पिछले महीने मॉस्को को निशाना बनाने वाला एक सख्त प्रतिबंध विधेयक पारित किया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह इस विधेयक को कानून का रूप दे दिया, लेकिन अब तक इन प्रतिबंधों को लागू नहीं किया गया है। उधर, यूक्रेन लौटने के बाद जेलेंस्की ने शुक्रवार को पत्रकारों को भेजे वॉयस मैसेज में कहा कि अमेरिका तीन देशों के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है। इसमें अमेरिका, यूक्रेन और रूस के प्रतिनिधिमंडल शामिल होंगे, लेकिन तीनों देशों के शीर्ष नेता इसमें हिस्सा नहीं लेंगे। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन अब अमेरिका की ओर से बैठक की तारीख बताए जाने का इंतजार कर रहा है।

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पुतिन और ट्रंप की बातचीत में भी वार्ता का मुद्दा उठा

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने शुक्रवार को कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ट्रंप ने इसी महीने की शुरुआत में हुई फोन बातचीत के दौरान निकट भविष्य में ऐसी बैठक आयोजित करने पर चर्चा की थी। हालांकि, अभी तक कोई ठोस योजना तय नहीं हुई है। शुक्रवार रात सेंट पीटर्सबर्ग में पत्रकारों से बातचीत में पुतिन ने रूस के भीतर और यूक्रेन के रूसी कब्जे वाले इलाकों पर हालिया यूक्रेनी हमलों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बातचीत फिर से शुरू करने के 'प्रस्ताव मेज पर हैं', लेकिन मॉस्को 'इस बारे में अच्छी तरह सोचेगा कि हमें क्या करना है।' इस साल की शुरुआत में रूस, यूक्रेन और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच तीन दौर की त्रिपक्षीय बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक इन वार्ताओं से कोई बड़ा ठोस नतीजा नहीं निकला है।

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